बोर्ड का खराब परीक्षा परिणाम राज्य की शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। खराब परीक्षा परिणाम को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बल्लभगढ़ तहसील के गढ़खेड़ा गांव के सरकारी स्कूल की दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले कुल 18 विद्यार्थियों में से 17 फेल हो गए।
महज एक विद्यार्थी पास हुआ जो कई महीनों से स्कूल आया ही नहीं लेकिन आज वह और बच्चों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है। परीक्षा परिणाम आने के बाद स्कूल इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
माना जाता है कि बच्चे को जैसा माहौल मिलता है उसका चरित्र निर्माण भी वैसा ही होता है। जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर गढ़खेड़ा गांव के सरकारी स्कूल ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद बीते साल शिक्षा विभाग गणित अध्यापक की कमी पूरी नहीं कर पाया।
नतीजतन, दसवीं कक्षा के अधिकांश बच्चे गणित की परीक्षा में दहाई का अंक भी हासिल नहीं कर पाए। शारीरिक शिक्षा, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषय में भी बच्चे 20 से ज्यादा अंक नहीं ले पाए। परीक्षा परिणाम ने स्कूल प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
दसवीं कक्षा में पढ़ने वाला विपिन जो हाथ टूटने के कारण लंबे समय से छुुट्टी पर चल रहा था, उसने बिना ट्यूशन के ही 50 प्रतिशत अंक हासिल किए और पास होकर स्कूल की लाज बचाने वाला एकमात्र छात्र बना। परीक्षा की तैयारी को लेकर विपिन से पूछा गया तो उसका कहना था कि खाट पर पड़े-पड़े करता भी क्या, इसलिए पढ़ाई करना उचित समझा।