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39वां स्थापना दिवस मना रहे नोएडा की राह के 5 रोड़े

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इसमें कोई शक नहीं कि नोएडा तरक्की के मामले में एनसीआर के बाकी शहरों से दो कदम आगे है, लेकिन विकास की इस राह में नोएडा के आगे रोड़े भी हैं। कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे लंबे समय से नोएडा जूझ रहा है।
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यहां कई ऐसी परेशानियां हैं जिनका लोगों की रोजमर्रा की लाइफ से वास्ता पड़ता है। कई चीजों के आराम के बावजूद बेसिक सुविधाओं की कमी लोगों को बहुत अखरती है। हालात सुधारने के लिए पिछले एक साल में कई परियोजनाओं की नींव भी पड़ी।

नोएडा के 39वें स्थापना दिवस के मौके नोएडा की आवश्यकताओं और उम्मीदों पर नजर डालती हमारी ये खास रिपोर्ट।

बिजली संकट और लचर यातायात हैं बड़ी चुनौती

नोएडा की पहली चुनौती बिजली संकट है। हर सीजन में होने वाली कटौती गर्मी आते विकराल हो जाती है। लोग गर्मी से जूझते हैं, तो उद्योगों का उत्पादन प्रभावित होता है। इसके दो कारण हैं। पहला, बाहर से पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती। दूसरा, उपलब्ध बिजली का वितरण सही ढंग से नहीं हो पाना। हालांकि, चार सौ केवी के दो सब स्टेशनों पर काम शुरू हुआ है, लेकिन इसके लिए तीन-चार साल इंतजार करना पड़ेगा।

हाईटेक शहर की यातायात व्यवस्था प्रदेश के पिछड़े जिलों जैसी है। यहां काम करने वाले लाखों लोग टूटी-फूटी बसों और टैंपो पर निर्भर हैं। सरकारी परिवहन के नाम पर रोडवेज की चंद बसें हैं, जिनका अता-पता नहीं रहता। स्पेशल परपज व्हीकल अथॉरिटी बनाकर सबकुछ बदलने की योजना तो बनी, मगर ये कागजों से नहीं निकल पाई। आधुनिक बसों, रिक्शा, ऑटो रिक्शा से सजी ये योजना शासन से मंजूरी का इंतजार कर रही है।

पार्किंग, कूड़े और अतिक्रमण से पार पाना नहीं आसान

पूरे शहर में शायद ही आपको कोई ऐसी सड़क मिले, जिसका एक तिहाई हिस्सा पार्किंग में इस्तेमाल न हो रहा हो। इन सड़कों को ही स्थायी पार्किंग घोषित कर ठेके पर दे दिया है। सेक्टर 18 मार्केट की हालत ऐसी है कि यहां कार से निकलना मुश्किल है।

इस शहर से रोजाना चार सौ टन से अधिक कूड़ा निकलता है। लेकिन, इसके निस्तारण के लिए शहर में एक भी लैंडफिल साइट नहीं है। इसे बनाने की योजना 15 साल से कागजों में घूम रही है। प्राधिकरण के चेयरमैन ने 2014 में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है और इसे निजी हाथों में सौंपने पर भी काम चल रहा है।

सड़कों पर कहीं भी रेहड़ी-पटरी लगी रहती हैं, इस अतिक्रमण ने मुख्य मार्गों को भी नहीं बख्शा है। सड़क किनारे गांवों की जमीन पर बाजार बन जाने से रास्ता बाधित हो रहा है। प्राधिकरण की अधिसूचित और कब्जा प्राप्त जमीन पर अतिक्रमण भी बड़ा संकट बन गया है।

परियोजनाएं ‌जिनकी पड़ीं नींव

सेक्टर 18 में मल्टीलेवल पार्किंग बन रही है। इसमें अभी दो साल और लगेंगे। यहां तीन हजार कारें खड़ी हो सकेंगी। तीन अंडरपास बनाने का काम शुरू हो चुका है। सिटी सेंटर का निर्माण करीब एक साल से चल रहा है, जबकि सेक्टर 94 और मॉडल टाउन अंडरपास का निर्माण मार्च में शुरू कर दिया गया है। यहां के चौराहे सिग्नल फ्री हो जाएंगे। होशियारपुर में बालिका इंटर कॉलेज और सर्फाबाद में मिनी स्टेडियम का निर्माण भी शुरू हो गया है। सेक्टर 34 में नारी निकेतन बन रहा है।

2014 में नोएडा से ग्रेटर नोएडा और सिटी सेंटर से सेक्टर 62 तक मेट्रो की नींव पड़ेगी। बॉटेनिकल गार्डेन से कालिंदीकुंज की नींव पहले ही पड़ चुकी है। नोएडा को 80 क्यूसेक गंगाजल भी अगले छह माह में मिलने लगेगा। एसपीवी का गठन कर बसें चलवाने के लिए निजी ऑपरेटर की तलाश हो रही है। सेक्टर 96 में प्राधिकरण के दफ्तर का निर्माण भी जल्द शुरू होने के आसार हैं। सेक्टर 123 व 148 में चार सौ केवी के दो सब स्टेशन बनाने और सेक्टर 39 में आठ मंजिला जिला अस्पताल बनवाने का काम भी जल्द शुरू होगा। नए थाने खोलने की तैयारी चल रही है।
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प्राधिकरण की सेवाएं होंगी ऑनलाइन

इस साल प्राधिकरण की सेवाएं ऑनलाइन हो जाएंगी। ट्रांसफर मेमोरंडम, नक्शा पास कराने, मोर्डगेज की परमिशन आदि के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे न केवल नोएडावा‌सी बल्कि बाहरी लोग भी लाभांवित होंगे।

इनफोसिस ने नोएडा में रखा कदम
प्राधिकरण ने पिछले एक साल में दुकानें, व्यावसायिक भूखंड, लेफ्टआउट फ्लैट और औद्योगिक योजना निकाली। इसके जरिये  इनफोसिस जैसी बड़ी आईटी कंपनी को लाने में सफलता मिली। इसके साथ हजारों युवाओं के ‌लिए नौक‌रियां भी नोएडा आएंगी। अब उन्हें अच्छी नौकरी के ‌लिए ‌किसी दूसरे शहर का मुंह नहीं देखना पड़ेगा।
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