बाइक बोट फर्जीवाड़े के तीन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर पर आधिकारिक मुहर लग गई है। बुधवार को एसटीएफ नोएडा यूनिट के एसपी राजकुमार मिश्रा ने ईओडब्ल्यू मेेरठ के साथ संयुक्त रूप से 50 हजार के इनामी करनपाल और संजय भाटी के भाई सचिन भाटी व वांछित पवन भाटी की गिरफ्तारी की जानकारी दी।
अमर उजाला ने बुधवार को ही तीनों की गिरफ्तारी की खबर प्रमुखता से प्रकाशित कर दी थी। आरोपियों से पूछताछ में मिले सुराग के बाद अब एसटीएफ और ईओडब्ल्यू मेरठ की टीम फर्जीवाड़े के फरार अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि करनपाल पूर्व फौजी है। वह छुट्टियों का ब्योरा एकत्र कर हजारों फौजियों को फर्जीवाड़े में फंसा चुका है।
मंगलवार रात सचिन भाटी और पवन भाटी कार में बैठकर अपने पैतृक गांव चीती जा रहे थे, इसी दौरान टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। करनपाल को मेरठ एसटीएफ और ईओडब्ल्यू की टीम ने गिरफ्तार किया। निवेशक मुन्ना बालियान ने बताया कि करनपाल अपने रिश्तेदार की मदद से संजय भाटी के संपर्क में आया। इसके बाद करनपाल फर्जीवाड़े में शामिल कुछ अन्य पूर्व फौजियों की मदद से आर्मी से उन जवानों का ब्योरा एकत्रित करना शुरू कर दिया, जो अपने घर छुट्टी पर जाने वाले हैं।
इसके बाद करनपाल छुट्टी पर आए फौजियों के घर जाने लगा और उन्हें पूर्व फौजी होने का हवाला देकर मोटे मुनाफे की बात कहकर बाइक बोट स्कीम में शामिल करने लगा। करनपाल के पूर्व फौजी होने के कारण हजारों फौजी, पूर्व फौजी व उनके परिजन गाढ़ी कमाई फर्जीवाड़े में लगा बैठे। अधिकारियों को जानकारी मिली है कि करनपाल ने फर्जीवाड़े से कमाई रकम से एक महिला के नाम बड़ी जमीन भी खरीदी है। अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।
वहीं, मुन्ना बालियान ने बताया कि संजय भाटी ने फर्जीवाड़े से कमाई रकम से देश के पर्यटन स्थलों के अलावा श्रीलंका, भूटान आदि देशों में होटल व अन्य संपत्ति एकत्रित की है। संजय भाटी के जेल जाने के बाद सचिन भाटी इस कारोबार की कमान संभाल रहा था। पवन के बारे में जानकारी मिली है कि उसने कोर्ट गांव स्थित बाइक बोट के मुख्य दफ्तर का जिम्मा संभाल रखा था। दिनभर पवन इस दफ्तर पर देखरेख व अन्य काम करता था और रात को जमा होने वाली रकम को वाहनों में ठिकाने लगाने ले जाता था।
तीनों आरोपियों का किरदार :
करनपाल
मेरठ ईओडब्ल्यू के मुताबिक, करनपाल वर्ष 2009 में सेनानायक पद से रिटायर हुआ था। इसके बाद सिक्योर लाइफ कंपनी और पब्लिक नेटवर्किंग से जुड़कर 9 साल तक सूट बेचने का काम किया। 2018 में संजय भाटी ने उसे सुनील प्रजापति के स्थान पर 2 लाख प्रतिमाह और फॉर्च्यूनर देकर कंपनी में शामिल किया था।
सचिन भाटी
संजय भाटी के बाद कंपनी में सचिन सबसे प्रभावशाली था। सचिन का निर्देश संजय भाटी का माना जाता था। गाड़ियों की खरीद-फरोख्त, फ्रेंचाइजी की नियुक्ति और धन हस्तांतरण में सचिन की महत्वपूर्ण भूमिका थी। करनपाल और सचिन भाटी के खिलाफ अदालत से गैर जमानती वारंट जारी हो चुके थे।
पवन भाटी
सचिन के बताए कार्यों को पवन भाटी कंपनी में करवाता था। वह असामाजिक तत्वों के संपर्क में था और बाउंसरों को साथ लेकर चलता था। संजय भाटी निवेशकों को डराने धमकाने के लिए पवन का इस्तेमाल करता था। पवन को कंपनी से फॉर्च्यूनर मिली हुई थी। साथ ही उसे डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह दिया जाता था।