दिल्ली के 55,00 ऑटो को पूरे एनसीआर में दौड़ाने के लिए दिल्ली सरकार ने नई पहल की है। कॉरपोरेट कंपनियों को एनसीआर परमिट देने के फैसले को कोर्ट में चुनौती मिल जाने के बाद इस योजना के अटकने के चलते सरकार ने दूसरा रास्ता अपनाया है। अब आम ऑटो चालकों को परमिट देने का फैसला किया है।
वहीं नोएडा के ऑटोवालों ने दिल्ली सरकार के फैसले के प्रति नाराजगी जताई है। ऑटो यूनियन की ओर से कहा गया है कि चाहे किसी भी योजना के तहत परमिट जारी किए गए हों। नोएडा में इसका विरोध किया जाएगा। योजना के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली गई है।
दिल्ली के नए परिवहन मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बताया कि एनसीआर में ऑटो रिक्शा का आवागमन नहीं होने के कारण यात्रियों को दिक्कतें पेश आती हैं। इसलिए एनसीआर परमिट जारी करने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि बुधवार से आरक्षित श्रेणी के बचे हुए 14 हजार ऑटो रिक्शा परमिट के आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
इतना ही नहीं दिल्ली सरकार, राजधानी में ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से और 50 हजार परमिट की मांग करने की तैयारी में जुट गई है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 45 हजार परमिट में से आरक्षित श्रेणी के लिए बचे करीब 14 हजार ऑटो रिक्शा परमिट के आवेदन इसी सप्ताह मंगाने का फैसला भी किया गया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि बुधवार से ओबीसी और एससी ऑटो चालकों से लाइसेंस, बैज और दिल्ली में रहने वाले चालकों से परमिट के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि एनसीआर के लिए 7 हजार परमिट के आवेदन कंपनियों से मंगाए गए थे। इसके लिए एक दर्जन कंपनियों ने आवेदन किया था। लेकिन कुछ लोग ऑटो माफिया का नाम लेकर कंपनियों को परमिट दिए जाने के खिलाफ कोर्ट में चले गए थे।
मामले की सुनवाई 13 जनवरी, 2014 को होगी। विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया है कि कोर्ट में यह जवाब देने वाले हैं कि अब कंपनियों की बजाय आम ऑटो चालकों को परमिट दिए जाएंगे।
उधर सोमवार को प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र सोनी की अगुवाई में ऑटो रिक्शा संगठन और परिवहन विभाग अधिकारियों की बैठक में सीएनजी दाम वृद्धि वापस लिए जाने या उसकी जगह सब्सिडी दिये जाने पर चर्चा की गई।