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आखिर कर्ज में कैसे डूबता जा रहा है ये धन कुबेर?

Tue, 11 Mar 2014 01:07 PM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा
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उत्तर प्रदेश का सबसे धनी प्राधिकरण ‘नोएडा’ खुद कर्ज तले दबता जा रहा है। 2012 में 2334 करोड़ का कर्ज प्राधिकरण पर लद चुका है। यह कर्जा किसी से उधार का नहीं, बल्कि डीएनडी फ्लाईवे का है।
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दरअसल, प्राधिकरण ने 1997 में नोएडा और दिल्ली के बीच कनैक्टिविटी के लिए फ्लाईवे बनाने का निर्णय लिया। 12 नवंबर 1997 को नोएडा प्राधिकरण और नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड के बीच अनुबंध हुआ। 7 फरवरी 2001 में यह बनकर चालू हो गया।

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इसे बनाने में कुल 408 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसे कंपनी ने खुद से वहन किया। इसकी भरपाई के लिए प्राधिकरण ने 30 साल के लिए डीएनडी पर टोल टैक्स वसूलने का अधिकार कंपनी को दे दिया।
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प्राधिकरण और डीएनडी के बीच हुए अनुबंध में यह शर्त रखी गई कि लागत और खर्च निकालने के साथ ही डीएनडी को हर साल 20 फीसदी का मुनाफा होगा। अगर मुनाफा न हुआ तो घाटे की यह धनराशि भी मूल रकम में जुड़ जाएगी और फिर अगले साल कुल कीमत का 20 फीसदी मुनाफा होना चाहिए।

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लेकिन घाटा हुआ तो इसकी भरपाई नोएडा प्राधिकरण करेगा। यानी चक्रवृद्धि ब्याज के अनुसार घाटा मूल कीमत में जुड़ता जाएगा। वहीं अब तक एक भी साल ऐसा नहीं रहा, जब डीएनडी को मुनाफा हुआ हो।

लगातार घाटा होने के कारण 2012 तक 2334 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। उसके बाद से अब तक का घाटा प्राधिकरण के पास भी उपलब्ध नहीं है क्योंकि उसके बाद ही फोनरवा ने इससे संबंधित याचिका हाईकोर्ट में दायर कर दी। याचिका में अनुबंध के मुनाफे वाली शर्त को हटाने और डीएनडी को टोल फ्री करने की मांग की गई है।

प्राधिकरण ने भी इस पीआईएल का समर्थन करते हुए शपथ पत्र दाखिल कर रखा है। इस पर 12 मार्च को सुनवाई है। वहीं, 2012 से अब तक का घाटा भी जोड़ लें, तो यह आंकड़ा 2400 करोड़ रुपये के पार होने का अनुमान है। मामला कोर्ट में होने के कारण प्राधिकरण और डीएनडी के अधिकारी इस पर कुछ भी कहने में असमर्थता जता रहे हैं।

अब तक 580 करोड़ की कमाई
डीएनडी की लागत 408 करोड़ है। 2012 तक डीएनडी ने वाहनों से टोल टैक्स के जरिये 580 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। यानी लागत से 172 करोड़ रुपये ज्यादा, लेकिन अनुबंध की शर्तों के चलते उल्टे प्राधिकरण पर 2334 करोड़ रुपये का कर्जा भी हो गया है।

नियमित निकलने वाले वाहनों की संख्या
डीएनडी के मुताबिक इस ब्रिज से रोजाना एक लाख से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। इसमें से 74 फीसदी कार, 25 फीसदी दो पहिया वाहन और एक फीसदी व्यवसायिक वाहन शामिल हैं।
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