मॉल्स, सड़कें और फुटओवर ब्रिज ही नहीं, बल्कि शौचालय भी अब नोएडा प्राधिकरण की आमदनी का जरिया बनेंगे। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में बनाए जा रहे 84 सार्वजनिक शौचालय पर विज्ञापन से प्राधिकरण सालाना करीब 30 करोड़ रुपये कमाएगा। लाइसेंस फीस के रूप में विज्ञापन एजेंसी यह रकम प्राधिकरण को देगी।
औद्योगिक शहर होने के नाते रोजाना लाखों लोग नोएडा आते हैं, लेकिन इनकी सुविधा के लिए इंतजाम नाकाफी हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत लगातार साफ-सफाई पर जोर दिया जा रहा है। इसके बाद भी खुले में शौच की समस्या खत्म नहीं हो रही।
इसे ध्यान में रख शहर में जगह-जगह 84 सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण की योजना प्राधिकरण ने बनाई थी। कई शौचालय बनकर लगभग तैयार हो गए हैं, जबकि कई का निर्माण जारी है। बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) आधार पर इन्हें बनाया जा रहा है। एक शौचालय के निर्माण पर 15 से 17 लाख रुपये खर्च का अनुमान है।
स्लोगन भी हो रहे तैयार
सार्वजनिक शौचालयों पर स्वच्छता के प्रति जागरूक करने वाले स्लोगन भी लिखे जाएंगे। इस तरह के स्लोगन सेक्टरों में कचरा निस्तारण के लिए लगाई जा रही कंपोस्ट मशीनों पर भी होंगे। 15 अगस्त तक स्लोगन तैयार हो जाएंगे।