शिकायतकर्ता मनोज तिवारी सांसद हैं तो आरोपी विधायक हैं। जो दस्तावेज व साक्ष्य पेश किए गए हैं, उनके अनुसार आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है। ऐसे में यदि खान को गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और एक अन्य जमानत राशि पर रिहा कर दिया जाए। साथ ही, अदालत ने खान को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है।
इससे पूर्व, अधिवक्ता बीएस जून ने अग्रिम जमानत आवेदन पेश करते हुए कहा कि खान को फर्जी मामले में फंसाया गया है, जबकि आरोपी तिवारी को बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने अदालत के समक्ष वीडियो की सीडी और फोटो पेश करते हुए कहा कि तिवारी अपने 1200 समर्थकों के साथ जबरन कार्यक्रम पर कब्जा करने के लिए पहुंचे थे।
उन्होंने दो बेरीकेड तोड़ दिए और प्रवेश निषेध क्षेत्र में जाकर हंगामा किया। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़ा और मीडिया के समक्ष धमकियां दीं कि उन्होंने पहचान कर ली है और सभी को सबक सिखाएंगे। अधिवक्ता ने कहा उनके खिलाफ पुलिस ने दबाव में प्राथमिकी दर्ज नहीं की।
यह मामला केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच चल रहे राजनीतिक द्वेष में दर्ज किया गया। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उनके मुवक्किल व सहआरोपी केजरीवाल ने तिवारी पर हमले का निर्देश दिया था। वहीं, सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले की जांच आरंभिक स्थिति में है।