आम्रपाली के एक खरीदार बिक्रम चटर्जी कहते हैं कि, 'हम खरीदारों ने अपना फ्लैट पाने के लिए कई दरवाजे खटखटाए लेकिन कहीं हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसका मतलब ये नहीं है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुकर सकता है।'
चटर्जी ही वह शख्स हैं जो सबसे पहले अपने फ्लैट के लिए 2017 में सुप्रीम कोर्ट गए थे। इसके बाद उन्हें सैकड़ों बायर्स का सहयोग मिला। चटर्जी इस वक्त गुरुग्राम में एक किराए के मकान में रहते हैं और 2017 से लेकर अब तक हुए तमाम प्रदर्शन और बैठकों में हिस्सा लेकर बायर्स की बात रख चुके हैं। आम्रपाली की कुल 15 रिहायशी प्रॉपर्टी हैं जिसमें कुल 42000 रिहायशी फ्लैट बने हैं। सिर्फ 12000 ही पूरे हो सके हैं।
आम्रपाली-जेपी मामले के समाधान पर टिका अन्य प्रोजेक्टों का भविष्य
आम्रपाली और जेपी के प्रोजेक्टों के समाधान पर अन्य प्रोजेक्टों का भविष्य टिक गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दोनों मामलों में अहम निर्देश और फैसला आना है। केंद्र सरकार भी खरीदारों को उबारने के लिए प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर रही है। इससे दूसरे अन्य प्रोजेक्टों की राह भी खुलेगी।
दरअसल, 18 जुलाई यानि आज सुप्रीम कोर्ट में खरीदारों का भविष्य तय हो सकता है। इसमें सरकार की योजना के साथ कोर्ट का अहम निर्देश खरीदारों को उबारने का काम कर सकता है। इससे आम्रपाली और जेपी समेत सभी प्रोजेक्टों का भविष्य तय होगा। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये से खरीदारों में आस जगी है कि इस दिन सुप्रीम कोर्ट कोई अहम निर्देश दे सकता है। यही नहीं आम्रपाली के मामले में कोर्ट को अलग से अहम फैसला भी देना है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को खरीदारों के हित में एक प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया है। इससे खरीदारों की समस्या का समाधान करने के बाबत कहा गया है। अब केंद्र सरकार का संबंधित मंत्रालय प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर रहा है। इससे खरीदारों को पता चलेगा कि केंद्र ने उनके लिए क्या समाधान योजना निकाली है।
यहां फंस रहा है मामला
बिल्डरों को जीरो पीरियड का मामला
बिल्डरों का कहना है कि प्राधिकरणों से उन्हें जीरो पीरियड दिलाया जाए। इससे कई बिल्डरों को तुरंत फायदा होगा। कई बिल्डरों ने प्राधिकरणों में एक तय समयावधि के लिए जीरो पीरियड की मांग की है, लेकिन प्राधिकरणों ने उनकी मांगों को मानने से मना कर दिया है। अगर केंद्र सरकार की ओर से इस बाबत कोई अहम निर्देश आता है और सरकार का दबाव पड़ता है तो प्राधिकरणों को इस मामले में जीरो पीरियड देने का फैसला करना पड़ सकता है, जो कहीं न कहीं प्रोजेक्ट को पूरा होने और खरीदारों का भविष्य तय करने में मदद कर सकता है।
डेवलपर्स ने बैंकों से करोड़ों रुपये का कर्ज प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लिया है, लेकिन प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए और कर्ज वैसे का वैसा ही रह गया। अब बैंकों की ओर से डेवलपर्स पर दबाव बना हुआ है। कई मामलों में बैंकों ने एनसीएलटी का भी रुख किया है। ऐसे में अगर सरकार कोई अहम फैसला लेती है और बैंकों के कर्ज को लेकर कहीं से कोई समाधान निकालती है तो डेवलपर्स का बोझ कम होगा और प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद मिलेगी।
प्रोजेक्टों में कौन डालेगा पैसा
यहां सबसे अहम सवाल यह है कि इन प्रोजेक्टों में कौन पैसा डालेगा। प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत है। इसके लिए को-डेवलपर की तलाश है, लेकिन को-डेवलपर पैसे की मांग कर रहे हैं। उनको लंबित पड़े प्रोजेक्टों में कोई फायदा नहीं दिख रहा है। लिहाजा, वह अपने पैसे नहीं लगाना चाह रहे हैं।
खरीदार भी कर रहे छूट की डिमांड
फ्लैट खरीदारों ने जब प्रोजेक्टों में बुकिंग कराई तो उनकी योजना यह थी कि दो से तीन साल में घर मिल जाएगा और किराये का चक्कर खत्म हो जाएगा। उनकी ओर से बैंकों की ईएमआई भरी जाएगी और अपने घर का सुख मिलेगा, लेकिन योजना धरी की धरी रह गई। उनको तय समय में घर नहीं मिला और किराये का चक्कर अभी भी सिर पर है। साथ ही, ईएमआई का बोझ भी है। उन्होंने यह मांग की है कि जब तक घर नहीं मिल जाता तब तक बैंकों को ईएमआई का दबाव नहीं डालना चाहिए। इसमें खरीदारों को डिफॉल्टर घोषित करते हुए कार्रवाई भी नहीं करनी चाहिए।
चाहे वह डेवलपर्स हों या फिर खरीदार। सबकी एक ही राय है कि बिना सरकारी मदद के प्रोजेक्टों का काम पूरा नहीं हो सकता है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी गेंद सरकार के पाले में डाली है। अब सरकार को निर्णय लेना है कि रियल एस्टेट का भविष्य संवारने के लिए उनकी ओर से क्या फैसला लिया जाता है।
गौतमबुद्ध नगर की स्थिति
कुल प्रोजेक्ट-250
फंसे प्रोजेक्ट-160
कुल खरीदार- करीब चार लाख
फंसे खरीदार- करीब 2.5 लाख
नोएडा में प्रोजेक्ट-105
ग्रेटर नोएडा में प्रोजेक्ट-145
जेपी के प्रोजेक्ट के खरीदार-32 हजार
आम्रपाली के प्रोजेक्ट के खरीदार-42 हजार
जेपी के फंसे खरीदार-22 हजार
आम्रपाली के फंसे खरीदार-40 हजार
रियल एस्टेट को उबारने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अहम निर्णय लेना होगा। इसमें जीरो पीरियड, बैंकों का टैक्स, को-डेवलपर्स के मुद्दे, प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पैसे का जुगाड़ सहित कई अहम मामले शामिल हैं। इसमें सरकार की मदद सबसे अहम कड़ी साबित होगी।- मनोज गौड़, उपाध्यक्ष, क्रेडाई नेशनल
जब तक कोई अहम निर्णय नहीं हो जाता तब तक जेपी के खरीदारों की आस नहीं जगेगी। खरीदारों के हित को लेकर इस तरह के मोड़ कई बार हमारे सामने आ चुके हैं, जब ऐसा लगता है कि अब हमारा काम हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।- एसपी मित्तल, खरीदार, जेपी
खरीदारों की समस्या का समाधान केवल स्ट्रेस फंड के माध्यम से ही हो पाएगा। इसके अलावा प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए कोई उपाय नहीं बचा है।- अभिषेक कुमार, अध्यक्ष, नेफोवा