नोएडा सेक्टर-94 में बीपीटीपी कैपिटल सिटी प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान कंपनी की लापरवाही सामने आ रही है। अहलुवालिया कांट्रैक्ट्स इंडिया लिमिटेड कंपनी के सेफ्टी और प्रोजेक्ट विंग ने शटरिंग के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया और सपोर्ट सिस्टम को भी हटा दिया। अगर यहां मानकों के मुताबिक काम होता तो चार मजदूरों की मौत नहीं होती।
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पुलिस व प्रशासन की प्राथमिक जांच में यह पता चला है कि 18 मंजिला निर्माणाधीन इमारत की शटरिंग ढांचा कमजोर था। इसका काफी वक्त से रखरखाव नहीं किया गया था। इससे फोल्डिंग वाल्व व कनेक्टिंग पिन ढीले होते गए।
इमारत के बाहरी हिस्से में केवल छोटे पत्थर व शीशे का काम बाकी है। इससे निर्माण कर रही कंपनी की तरफ से शटरिंग के सपोर्ट सिस्टम को कुछ दिनों पहले हटा दिया गया था। वहीं, ढीले कनेक्टिंग पिन को काफी दिन से देखा नहीं गया था। ऐसे में सपोर्ट सिस्टम हटने व पिन ढीला होने से जब रेत से भरा ट्रैक्टर टकराया तो शटरिंग का ढांचा भरभराकर गिर गया।
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यह होता है सपोर्ट सिस्टम
किसी बहुमंजिला इमारत के बाहर जब शीशे व रंगरोगन से लेकर अन्य तरह का काम करना होता है तो बाहर से लोहे की शटरिंग लगाई जाती है। लोहे के पाइप को आपस में सेफ्टी वाल्व व पिन से कनेक्ट किया जाता है। इस पूरे ढांचे को इमारत की अंदर की तरफ से सपोर्ट दिया जाता है यानी हर 10 से 15 फीट की दूरी पर शटरिंग को बिल्डिंग के अंदर से लोहे, रस्सी आदि से सपोर्ट दिया जाता है, ताकि ढांचा नहीं गिरे। मजदूरों ने बताया कि काम कम होने से सपोर्ट सिस्टम हटा दिया गया था।
यह एक हादसा है। कंपनी फुलप्रूफ तरीके से बिल्डिंग निर्माण का काम करती है। हम हर मानकों को ध्यान में रखते हैं। हादसे में मारे गए व घायल हुए सभी हमारे लोग हैं। हम उन्हें हरसंभव मदद करेंगे।- आरपी सिंह, एजीएम, अहलुवालिया कॉट्रैक्ट्स इंडिया लिमिटेड
खुद को बचाने में जुटे रहे सरकारी अधिकारी-बिल्डर प्रतिनिधि
noida shuttering collapse
- फोटो : अमर उजाला
नोएडा सेक्टर-94 में रविवार को शटरिंग गिरने से हुई चार मौतों ने एक बार फिर सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया है। सभी जिम्मेदार लोगों की ओर से इन मौतों को भुलाकर पूरे दिन खुद को बचाने की कोशिशें होती रहीं। चाहे वह सरकारी अधिकारी हों या फिर बिल्डर प्रतिनिधि सब अपना-अपना तर्क देते रहे।
इस रवैये से नोएडा-ग्रेटर नोएडा हादसों का शहर बनते दिख रहे हैं। हाल ही में शाहबेरी गांव में दो इमारतों के गिरने से नौ लोग लोगों की मौत को गई थी। अब सेक्टर-94 हादसा हो गया। हादसे की मूल वजह ट्रैक्टर ट्रॉली का शटरिंग से टकराना बताया जा रहा है, लेकिन शटरिंग को बांधने के दौरान उसके मानकों के मुताबिक कई काम करने होते हैं जो नहीं किए गए थे। ऐसे में इसकी जवाबदेही किसकी होगी यह तय नहीं है।
हमारा इससे कोई मतलब नहीं है...
हादसे की खबर फैलने के बाद नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बिल्डर साइट पर दौड़ लगा दी। वहां पहुंचने के बाद पता चला कि शटरिंग की किसी तकनीकी कमी से हादसा हुआ है। उसके बाद अधिकारी इस घटना से कटने लगे। दरअसल, किसी भी भूखंड के आवंटन के बाद उस पर इमारतें बनाने के दौरान बिल्डर को कई शर्तों का पालन करना होता है।
इसी में हादसे से बचाव के लिए उपाय करने को भी बिल्डर बाध्य होता है, लेकिन रविवार की बयानबाजी से ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ ठीक था और किसी की गलती यहां नहीं थी। खास बात यह कि किसी ने कोई कार्रवाई करने तक का जिक्र नहीं किया। किसी ने यह नहीं बताया कि बिल्डर साइट पर सुरक्षा मानक का पालन नहीं किया जा रहा हो तो कौन सा विभाग कार्रवाई करेगा।
ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में लगातार हो रहे हादसे
noida shuttering collapse
- फोटो : अमर उजाला
कोई भी ऐसा हफ्ता नहीं होता, जब नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में छोटे-बड़े हादसे नहीं होते। इसमें प्रमुख रूप से छत की सीलिंग गिरना, छज्जा गिरना, प्लास्टर गिरना, लिफ्ट गिरने की घटनाएं आम हैं। जब इस तरह का निर्माण होता है तो यह भी शर्तों में ही आता है कि ठोस निर्माण करना है, ताकि किसी तरह का हादसा न हो। यही नहीं इसकी ओसी देने से पहले प्राधिकरण को यह जांच करनी होती है कि निर्माण सही प्रकार से हुआ है या नहीं, लेकिन जल्द पजेशन देने के चक्कर में क्वालिटी नहीं देखी जाती, जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ता है।
इमारतों से संबंधित यह हुए हादसे
- 18 जुलाई को ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में दो इमारतें गिरने से 9 लोगों की मौत
- 20 अगस्त को निराला एस्पायर में लिफ्ट गिरने से एक घायल
- 1 सितंबर को पंचशील ग्रीन-1 में लिफ्ट गिरने से हादसा
- 21 सितंबर को निराला एस्पायर में फिर लिफ्ट का हादसा, गर्भवती फंसी
- 7 सितंबर को ग्रेनो वेस्ट के ईको विलेज में लिफ्ट गिरी
- 7 सितंबर को सेक्टर-18 सेंटर स्टेज मॉल में छज्जा गिरा, दो दुकानों को नुकसान
- 27 जुलाई को सेक्टर-121 में तीन मंजिला इमारत गिरी
- 30 जूृन को ग्रेनो वेस्ट की पंचशील हाइनिश में लिफ्ट का हादसा
निर्माणाधीन इमारत की शटरिंग गिरने से चार मजदूरों की मौत मामले में एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा ने बताया कि लापरवाही को देखते हुए चौकी प्रभारी की तरफ से सेक्टर-39 थाने में गैर इरादतन हत्या व अन्य धाराओं में कंस्ट्रक्शन करने वाली कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
श्रम विभाग दिलाएगा 8-8 लाख रुपये का मुआवजा
इस हादसे को लेकर डिप्टी लेबर कमिश्नर प्रदीप सिंह ने बताया कि श्रम विभाग अपने स्तर से मुआवजा दिलवाने के काम कर रहा है। कंस्ट्रक्शन कंपनी से भी 8-8 लाख रुपये का मुआवजा दिलवाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए कंपनी मैनेजमेंट से बात चल रही है। साथ ही, जिला प्रशासन भी मुआवजा दिलाने के लिए प्रयास कर रहा है।
दिनभर मची रही अफरातफरी
हादसे के बाद दिन भर अफरातफरी मची रही। मौके पर भारी भीड़ जुट गई। कई लोगों ने खुद से मलबा हटाने में पुलिस वालों का साथ भी दिया। बाद में कई ऐसे लोग भी वहां पहुंचे जिनके सगे संबंधी उस प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। वहां मौजूद लोगों के बीच बिल्डर को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रही थीं।
रस्सी भी नहीं बांधे थे मजदूर
बताया जा रहा है कि 18 मंजिला बिल्डिंग की शटरिंग पर चढ़कर काम कर रहे मजदूर हादसे के वक्त हेलमेट तो पहने थे, लेकिन रस्से से कोई सपोर्ट नहीं दिया गया था। जबकि मानकों के मुताबिक, हाइराइज बिल्डिंग की शटरिंग पर काम करने वाले मजदूरों को रस्सी से सपोर्ट मिलना जरूरी है। इस बारे में कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारी जवाब देने से बचते रहे।
14.17 एकड़ में बन रही इमारत
सेक्टर-94 में बीपीटीपी प्रमोटर का 14.17 एकड़ में स्पेशल प्रोजेक्ट बन रहा है। नोएडा-दिल्ली बॉर्डर के पास बन रहा कैपिटल सिटी प्रोजेक्ट काफी खास है। कंपनी की तरफ से इसे एनसीआर की सबसे बेहतरीन कमर्शियल साइट होने का दावा किया गया है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 1 नवंबर 2010 में ही हुई थी। हालांकि, कुछ समय बाद ही एनजीटी की तरफ से ओखला बर्ड सेंचुरी की 10 किमी के दायरे में होने वाले निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद 1 जनवरी 2017 से इसका निर्माण कार्य फिर से शुरू किया गया था। इसे मार्च 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।