नोएडा जिला विद्यालय निरीक्षक ने गैर मान्यता प्राप्त 14 स्कूलों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर बंद करने के निर्देश दिए हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर शुरू हुई जांच में स्कूलों के गैर मान्यता प्राप्त होने की बात सामने आई है। निर्धारित समय के बाद स्कूल का संचालन बंद नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। इस फैसले से यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित होने की आशंका है।
जिला विद्यालय निरीक्षक डाॅ. धर्मवीर सिंह ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देश के बाद जांच के लिए स्थानीय स्तर पर चार टीमों का गठन किया गया। बिसरख ब्लॉक में सेक्टर-12 स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल अमित कुमार, सदर में सलेमपुर गुर्जर स्कूल की प्रिंसिपल रजनी पिलानिया, जेवर के सर्वहितकारी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल तेजपाल भाटी और दादरी में राजकीय हाईस्कूल शादीपुर छिड़ौली के प्रिंसिपल मूलचंद्र की अध्यक्षता में जांच हुई।
जांच टीमों ने रिपोर्ट के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षण ने स्कूलों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कई स्कूल ऐसे मिले हैं, जिनके पास 8वीं तक की मान्यता है, लेकिन वो 10वीं और 12वीं के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। गैर मान्यता प्राप्त होने की वजह से कई बार छात्रों का बोर्ड में पंजीकरण नहीं हो पाता है। विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाते। इससे उनका एक साल खराब हो जाता है।
नए नियमों ने लगाया घर-घर स्कूल खोलने पर ब्रेक
दरअसल, नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद से जिले में नए स्कूल खुलने पर ब्रेक लग गया है। जहां पहले हर साल नए स्कूल शुरू करने के लिए 150 से ज्यादा आवेदन आ रहे थे वहीं, इस बार अब तक सिर्फ आठ आवेदन आए हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत शहरी क्षेत्रों में स्कूल शुरू करने में आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि अब स्कूल खोलने के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत पड़ रही है, जिसके लिए स्कूल संचालक को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। इसलिए भी कम आवेदन आ रहे हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शहरी क्षेत्र में विद्यालय खोलने के लिए 3000 वर्ग मीटर भूमि अनिवार्य कर दी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 6000 वर्ग मीटर जमीन का मानक बनाया गया है। वहीं, प्राथमिक स्कूल शुरू करने के लिए शहरी क्षेत्र में 500 वर्ग मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 1000 वर्ग मीटर खेल का मैदान होना अनिवार्य है। उच्च प्राथमिक स्कूल के लिए शहरी क्षेत्र के लिए 1000 वर्ग मीटर और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 2000 वर्ग मीटर का मैदान होने पर ही बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल खोलने की मान्यता दी जाएगी। पहले खेलकूद के मैदान के लिए आकार का कोई सख्त नियम नहीं था। अब दोनों प्रकार के स्कूल के लिए 400 वर्ग फीट का एक अतिरिक्त कक्ष भी अनिवार्य किया गया है, जिसमें बच्चों के लिए शैक्षणिक गतिविधियां सुविधापूर्ण तरीके से संचालित हो सकें।