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आधी आबादी कर दी अनदेखी, महिला को नहीं बनाया प्रत्याशी

Sun, 24 Mar 2019 03:02 AM IST
vivek shukla प्रगति मिश्रा, अमर उजाला, नोएडा
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सांकेतिक तस्वीर
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महिलाओं को भारतीय कानून में बराबरी का दर्जा प्राप्त है। महिलाओं के राजनीतिक अधिकार भी पुरुषों के समान हैं। लेकिन आज भी राजनीति में महिलाओं को वह दर्जा नहीं मिल पाता, जिससे वह वाकई में आधी आबादी की प्रतिनिधि के रूप में प्रतिष्ठित हो सकें। महिलाओं को टिकट देते समय अधिकांश राजनीतिक दल आरक्षित सीटों को ही तवज्जो देते हैं। सामान्य सीटों पर महिलाओं को कम ही टिकट मिल पाता है। 2009 में नवगठित लोकसभा सीट गौतमबुद्ध नगर से अब तक किसी भी बड़े राजनीतिक दल ने महिला प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है। इससे नारी शक्ति पर संशय बना हुआ है। 

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गौतमबुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र में कुल 22,41,234 मतदाता हैं। जिसमें 10,08,475 महिलाएं है। इसमें नोएडा विधानसभा में 2,74,538, दादरी में 2,31,676, जेवर में 1,50,206, सिकंदराबाद में 1,77,507 और खुर्जा विधान में 1,74,548 महिला वोटर हैं। चुनाव में उम्मीदवारों का भविष्य तय करने में महिला वोटरों की बड़ी भूमिका रहती है। इसके बाद भी महिला उम्मीदवार को टिकट ना मिलने पर आश्चर्य होता है।

गौतमबुद्व नगर को जिले की मान्यता महिला मुख्यमंत्री (पैतृक घर गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर) बसपा सुप्रीमो मायावती ने दी गई थी। लेकिन उनकी पार्टी ने भी आज तक यहां से किसी महिला उम्मीदवार चुनावी रणभेरी नहीं उतारा है। 2009, 2014 के बाद अब 2019 में गौतमबुद्ध नगर सीट पर तीसरा लोकसभा चुनाव हो रहा है। भाजपा ने तीनों बार डॉ. महेश शर्मा को उम्मीदवार बनाया।

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महिला को टिकट मिलता तो अच्छा होता

बसपा ने 2009 में सुरेंद्र सिंह नागर, 2014 में सतीश अवाना और 2019 में गठबंधन के तहत सतवीर नागर उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने भी 2009 और 2014 में रमेश चंद्र तोमर  व 2019 में डॉ. अरविंद सिंह को प्रत्याशी बनाया है। सपा से 2009 व 2014 में नरेंद्र भाटी चुनाव लड़े थे। 2019 में अब बसपा के खाते में सीट जाने से सतवीर नागर को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि निर्दलीय व अन्य छोटे दलों ने महिलाओं को मौका दिया, लेकिन जीत नहीं हासिल हो सकी।

महिला राजनीतिज्ञ कर्मठता से अपने दायित्वों का निर्वाह कर रही हैं। यदि किसी महिला उम्मीदवार को टिकट मिलता तो अच्छा होता। लेकिन ऐसा अब तक हुआ नहीं है। भविष्य में भी आसार कम नजर आते हैं। क्योंकि बड़े पदों पर बैठी महिलाएं ही महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं देती हैं। 
सुशीला भारती, बसपा नेत्री 

महिलाओं को उचित स्थान मिलना चाहिए 
इस बार पार्टी के पदाधिकारियों के सामने यह मांग उठाई थी कि महिला प्रत्याशी का चयन होना चाहिए। महिलाओं को राजनीति में उचित स्थान दिलाने के लिए यह आवश्यक है। हालांकि किन्हीं कारणों से इस बार ऐसा हो नहीं सका। लेकिन हमारी पार्टी ने अन्य स्थानों पर महिला उम्मीदवारों को तवज्जो दी है। 
पुष्पा कांडपाल, अध्यक्षा कांग्रेस महानगर  

भविष्य में महिला सांसद बनेगी
पार्टी में महिलाओं को हमेशा महत्व दिया गया है। विधानसभा में हमने महिला प्रत्याशियों को टिकट भी दी है। लेकिन लोकसभा में डॉ. महेश शर्मा की लोकप्रियता एवं सर्वसम्मति के आधार पर उन्हें टिकट दिया गया है। उम्मीद है कि भविष्य में हमारी लोकसभा से भी कोई महिला सांसद बनेगी।  
डिंपल आनंद, अध्यक्षा, भाजपा महानगर 
 
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