एक तरफ डीएम के आदेश पर शहर से अवैध विज्ञापन और यूनिपोल काटे जा रहे हैं, दूसरी तरफ अब इंदिरापुरम में अवैध यूनिपोल का ‘खेल’ शुरू हो गया है। न टेंडर जारी हुआ, न ठेका दिया गया, बावजूद इसके एक फर्म ने इंदिरापुरम के साथ-साथ राजनगर एक्सटेंशन में भी बिना परमिशन करीब 40 यूनिपोल और गेट एंट्री लगा लिए।
लोगों और जिला प्रशासन को गुमराह करने के लिए फर्म ने इन यूनिपोल पर ‘जीडीए एप्रूव्ड’ भी लिख दिया। हालांकि जीडीए और नगर निगम दोनों विभागों के अधिकारी ठेका दिए जाने से इंकार कर रहे हैं।
शहर में अवैध यूनिपोल की बाढ़ सी आ गई है। राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में नगर निगम भी कार्रवाई नहीं कर रहा था। ‘अमर उजाला’ ने इन अवैध यूनिपोल के ‘खेल’ को उजागर किया तो डीएम अजय शंकर पांडेय ने इन यूनिपोल को काटने के निर्देश दिए।
इसके बाद राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में अवैध यूनिपोल काटे भी गए, लेकिन अब इंदिरापुरम में अवैध यूनिपोल का खेल शुरू कर दिया गया है।
‘प्लेनेट मीडिया’ नाम की फर्म ने इंदिरापुरम में कई यूनिपोल खड़े कर दिए हैं। यह क्षेत्र अभी नगर निगम को हैंडओवर नहीं है, ऐसे में निगम इस क्षेत्र में कार्रवाई भी नहीं करता है। इसी का फायदा उठाकर यूनिपोल माफिया यहां अब बिना अनुमति के यूनिपोल लगाकर कमाई कर रहे हैं।
विज्ञापन टैक्स भी नहीं दे रहे नगर निगम को
नगर निगम जिन फर्मों को विज्ञापन का ठेका देता है, उनसे एक मुश्त सिक्योरिटी मनी और सालाना विज्ञापन शुल्क भी लेता है। 40 यूनिपोल से नगर निगम को हर साल करीब 1.75 करोड़ रुपये विज्ञापन टैक्स मिलता है।
बिना ठेके के लगाए गए यूनिपोल से निगम को यह टैक्स भी नहीं मिल रहा। यानी विज्ञापन माफिया बिना टैक्स दिए ही हर साल करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं। निगम सूत्रों का कहना है कि विज्ञापन के इस खेल में फर्मों को नगर निगम के ही कुछ कर्मचारियों का भी संरक्षण प्राप्त है।
अधिकारी बोले
जीडीए ने किसी भी फर्म को इंदिरापुरम में यूनिपोल या विज्ञापन का ठेका नहीं दिया है। यह नगर निगम का अधिकार है। जीडीए ने खुद अपनी योजनाओं के विज्ञापन लगाने को नगर निगम से अनुमति ली थी। नगर निगम यूनिपोल पर कार्रवाई करें, जीडीए उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। - संतोष कुमार राय, जीडीए सचिव
इंदिरापुरम क्षेत्र नगर निगम को हैंडओवर नहीं है। निगम ने यहां विज्ञापन का ठेका नहीं छोड़ा है। किसी फर्म ने अगर अवैध यूनिपोल लगा लिए हैं तो इसकी जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
-दिनेश चंद्र, नगरायुक्त