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निर्भया के माता-पिता ने दोषियों को जल्द फांसी की अर्जी ट्रांसफर करने की मांग उठाई

Sun, 17 Nov 2019 03:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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दिसंबर 2012 में निर्भया से दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषियों को जल्द सजा दिलवाने के लिए निर्भया के माता-पिता ने संबंधित अर्जी की सुनवाई मौजूदा जज से किसी अन्य जज के समक्ष भेजने के लिए अर्जी दायर की है। पटियाला हाउस कोर्ट इस याचिका पर 25 नवंबर को सुनवाई करेगी।

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निर्भया के माता पिता की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा उन्होंने अदालत का दरवाजा तब खटखटाया जब दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी चुकी है और उन्हें दोषी ठहराए जाने के बावजूद फांसी नहीं दी जा रही है। इस संबंध में उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया है कि तिहाड़ जेल अधिकारियों को यह निर्देश दिये जाएं कि वह निर्भया के दोषियों को शीघ्र फांसी दें।

उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर 2012 की रात में पैरा मेडिकल की 23 वर्षीय छात्रा निर्भया के साथ साउथ दिल्ली इलाके में एक चलती बस में 6 लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस दौरान निर्भया के साथ मौजूद उसके एक पुरुष मित्र के साथ भी मारपीट की गई थी। इस वारदात को अंजाम देने के बाद निर्भया और उसके दोस्त को चलती बस से नीचे फेंक दिया गया था।
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इस वारदात में शामिल छह अपराधियों में से एक ने जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी जबकि एक नाबालिग अपराधी को किशोर न्यायालय ने तीन साल की सजा दी थी जिसके बाद उसे 2015 में जेल से रिहा कर दिया गया था। चार दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर 14 मार्च, 2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। 

हाईकोर्ट के आदेश को दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी थी लेकिन सुनवाई के बाद चारों दोषियों की याचिका को नौ जुलाई, 2018 को खारिज कर उनकी फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने 31 अक्टूबर को दोषियों को एक नोटिस जारी कर उन्हें राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए कहा था। कानून के अनुसार, दोषी राष्ट्रपति से दया की मांग कर सकते हैं और मौत की सजा को उम्रकैद में बदलवा सकते हैं। यदि राष्ट्रपति दया याचिका पर अपनी स्वीकृति देते हैं तो दोषी फांसी से बच सकते हैं।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों को फौरन फांसी दिये जाने की मांग को 13 दिसंबर, 2018 को याचिका कर दिया था। इस याचिका पर न्यायमूर्ति  मदन बी. लोकुर ने कहा था कि यह किस तरह की मांग आप कोर्ट से कर रहे हैं। आपकी याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, हम इसे खारिज करते हैं।

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