विधानसभा में सिख गुरुओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सिख गुरुओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि सदन की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हुई है। एफएसएल ने वीडियो का फ्रेम-टू-फ्रेम विश्लेषण किया, जिसमें रिकॉर्डिंग और शब्दशः कार्यवाही पूरी तरह एक-दूसरे से मेल खाती पाई गई। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने के संकेत दिए।
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रेस वार्ता में कहा कि एफएसएल रिपोर्ट निर्णायक है और सदन की कार्यवाही की प्रामाणिकता, मौलिकता और अखंडता की पुष्टि करती है। इसके बावजूद पंजाब में एक समानांतर फॉरेंसिक जांच कराए जाने और एफआईआर दर्ज होने पर उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया दिल्ली विधानसभा के सर्वसम्मत निर्णय और विधिक मर्यादाओं के विपरीत है। विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि विपक्ष की मांग पर सदन की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा था। एफएसएल में कानूनी मानकों के अनुसार वैज्ञानिक परीक्षण किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब की फॉरेंसिक जांच किस अधिकार के तहत कराई गई। वीडियो का स्रोत क्या था और उसकी चेन ऑफ कस्टडी कैसे सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि पंजाब की फॉरेंसिक रिपोर्ट को चुनौती देने का अवसर नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। पूरे मामले में संभावित साजिश और राज्य एजेंसियों के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए उन्होंने सीबीआई जांच कराए जाने के संकेत दिए। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी को सदन में अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब भी उनके पास आपत्तिजनक बयान वापस लेने और सदन से माफी मांगने अवसर है।