यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार रात करीब 11 बजे जेवर टोल प्लाजा और राया कट के बीच बदमाशों ने आगरा की तरफ से आने वाले वाहन चालकों को लूटने की कोशिश की। गनीमत रही की चालकों की सूझबूझ के चलते बदमाशों की साजिश फेल हो गई, लेकिन इस दौरान एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। बदमाशों से बचकर वाहन चालक 35 किलोमीटर तक वाहन दौड़ाते रहे, लेकिन उन्हें कहीं पर भी पुलिस नहीं मिली।
यमुना एक्सप्रेसवे पर ग्रेटर नोएडा से आगरा तक के 165 किलोमीटर के सफर में बेहतर सुरक्षा के लिए जेपी इंफ्राटेक ने 15 निजी पेट्रोलिंग गाड़ियां और पुलिस को पेट्रोलिंग के लिए 6 वाहन दे रखे हैं। साथ ही किसी भी आपात स्थिति के लिए 5 एुबुलेंस और 5 क्रेन भी 24 घंटे एक्सप्रेसवे पर तैनात रहती हैं।
बुधवार रात आगरा से भाई की प्री वेडिंग शूटिंग से लौटते वक्त बदमाशों ने दिल्ली के पीतमपुरा निवासी कारोबारी अमित गोयल को घेर लिया। अमित के अनुसार मथुरा टोल पार करते ही बदमाशों ने उनका पीछा शुरू कर दिया। बदमाशों ने उनकी सफारी गाड़ी को रुकवाने के लिए ओवरटेक किया।
कारोबारी के गाड़ी नहीं रोकने पर बदमाशों ने पत्थर व लोहे की रॉड फेंककर गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। यही नही कारोबारी की गाड़ी के नहीं रुकने पर वहां से गुजर रही पांच अन्य गाड़ियों में भी बदमाशों ने लूट की कोशिश की, लेकिन चालकों की सूझबूझ के चलते बदमाश नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए।
पांच जिलों की पुलिस पर सुरक्षा का जिम्मा
लूट
- फोटो : अमर उजाला
ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे पर पांच जिलों- गौतमबुद्धनगर, अलीगढ, मथुरा, हाथरस और आगरा पुलिस तैनात रहती है। एक्सप्रेसवे इकौटेक, कासना, दनकौर, रबुपूरा, जेवर, टप्पल, नौहझील, सुरीर, मांट, राया, यमुनापार, महावन, बलदेव, एत्मादपुर, खदौली सादाबाद सहित कुल 16 थाना क्षेत्रों की सीमा क्षेत्र से गुजरता है ऐसे में एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों की सुरक्षा की जिम्मदारी भी इन्हीं थाना क्षेत्रों की बनती है।
बुधवार रात यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली के कारोबारी सहित छह गाड़ियों में लूट की कोशिश के बाद घबराए वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियों को दौड़ाना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने रास्ते में जेपी इंफ्राटेक की सिक्योरिटी गाड़ियों पर भरोसा न करते हुए उन्हें घटना की जानकारी नहीं दी। सभी वाहन को दौड़ाते हुए सीधे जेवर टोल पहुंचे और जेवर पुलिस से ही शिकायत की।
रात में घटना के बाद सभी गाड़ियों में सवार लोग डरे हुए थे। उन्हें पुलिस की सुरक्षा में रात को अपने घरों के लिए भेज दिया गया। सभी लोग बृहस्पतिवार को घटना की शिकायत दर्ज कराने की बात कहकर गए थे, लेकिन दोपहर बाद तक कोई भी पीड़ित शिकायत दर्ज कराने के लिए नहीं आया है।