दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सिर्फ लड़कियों पर पाबंदियां लगाने के बजाय लड़कों को सम्मान और सहमति का पाठ पढ़ाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को मैत्रेयी कॉलेज में ‘परंपरा से प्रगति’ कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि लड़कों को यह समझना होगा कि दूसरे लोगों का सम्मान कैसे करना है और ‘नो’ का मतलब ‘नो’ होता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में डर या आतंक की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। गलत करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सीएम ने कहा, दिल्ली में जब लड़कियों की सुरक्षा को लेकर घटनाएं सामने आती हैं तो परिवार अक्सर उनकी आवाजाही पर रोक लगाने की बात करते हैं। लेकिन पाबंदियां सिर्फ लड़कियों पर क्यों हों, लड़कों को भी समझाया जाना चाहिए कि उनकी जिम्मेदारियां और सीमाएं क्या हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित माहौल बनाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। सीएम ने कहा कि शहर में कोई गलत काम करेगा तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। मैं दिल्ली की हर बेटी के साथ खड़ी हूं। मेरा लक्ष्य ऐसी दिल्ली बनाना है, जहां बेटियां बिना डर के कहीं भी आ-जा सकें। उन्होंने सुरक्षा के साथ अधिकारों और कर्तव्यों को समझने की जरूरत भी बताई।
लड़कियां पहले खुद को चुनें
मुख्यमंत्री ने छात्राओं से कहा कि महिलाएं अक्सर परिवार को खुद से ऊपर रखती हैं। उन्हें पहले खुद को चुनना चाहिए और अपने विकास पर ध्यान देना चाहिए। अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुख्यमंत्री बनकर छात्राओं से संवाद करेंगी। उन्होंने महिलाओं की प्रगति को देश की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि लड़कियों और महिलाओं की भागीदारी बढ़ना जरूरी है।