दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर संभल कर चलें, नियमों की खुलेआम हो रही अनदेखी
गीता कॉलोनी से लोनी बॉर्डर टोल तक पड़ताल के दौरान मिली कई खामियां
फिरदौस आलम
पूर्वी दिल्ली।
दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर संभल कर चलें। यहां खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है। मार्ग पर पैदल रिक्शा से लेकर ई-रिक्शा, टैम्पों से लेकर ट्रैक्टरऔर दो पहिए वाहन समेत अन्य वाहन भी धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। इन वाहन चालक खुद के साथ-साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं।बृहस्पतिवार को जब राष्ट्रीय राजमार्ग की पड़ताल की गई तो गीता कॉलोनी से लेकर लोनी बॉर्डर टोल तक कई खामियां मिलीं। कई ऐसे यू-टर्न मिले, जहां वाहन चालक उल्टी दिशा में वाहन चलाते नजर आए। इन वाहन चालकों को रोकने के लिए एक भी जिम्मेदार दिखाई नहीं दिया।
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उल्टी दिशा में चल रहे हैं वाहन
गीता कॉलोनी से लोनी बॉर्डर की ओर वजीराबाद-करनाल, सीलमपुर-शास्त्री पार्क और भजनपुरा-खजूरी के पास कई कट प्वाइंट बने हैं। यहां पर नो यू-टर्न का साइन बोर्ड लगे होने के बावजूद वाहन चालक यू-टर्न लेते नजर आए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीसीटीवी कैमरा लगे होने के बावजूद नियमों की अनदेखी हो रही है। नियमों का पालन कराने वाले भी नदारद हैं।
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नो सेल्फी जोन में लोग खींच रहे फोटो
खजूरी खास मेट्रो स्टेशन के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर पारदर्शी शीशे लगाए गए हैं। यहां नीचे की ओर बेहद सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। इस दृश्य को देखने और अपने मोबाइल फोन में कैप्चर करने के लिए लोग अपने वाहन रोक रहे हैं। साथ ही नो सेल्फी जोन में वीडियो, तस्वीर और खुद के साथ सेल्फी भी ले रहे हैं।
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स्टॉपिंग जोन बना कूड़ेदान, मिला मृत जानवर का अवशेष
मार्ग पर बने स्टॉपिंग जोन अब कूड़ेदान में तब्दील हो गए हैं। यहां पर मलबा और कूड़ा भरा हुआ है। शास्त्री पार्क पुस्ता स्थित गाजियाबाद और नोएडा की ओर जाने वाले मार्ग में स्टॉपिंग जोन में कूड़े के साथ-साथ एक मृत जानवर का अवशेष भी पड़ा मिला, जिसका मांस सड़ गया और सिर्फ कंकाल और चमड़ा बचा है।
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ड्रेनेज सिस्टम में भी मिली खामियां
करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत में बने दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारिश के बाद ड्रेनेज सिस्टम में खामियां देखने को मिलीं। कई हिस्सों में बारिश का पानी जमा होने के बाद वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जलभराव की वजह वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई, जिससे आवागमन तो प्रभावित हुआ ही और इसके साथ-साथ दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई। इतनी ज्यादा लागत से तैयार किए गए इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुरुआती बारिश में ही जलभराव होना निर्माण कार्य और ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।