फरीदाबाद।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नियम फरीदाबाद में कागजों तक सिमटा है। हरियाणा सरकार के आदेश पर परिवहन विभाग ने बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों में पेट्रोल-डीजल नहीं भरने के निर्देश दिए हैं। रविवार को अमर उजाला ने इसकी जमीनी हकीकत जांची। शहर के चार पेट्रोल पंपों पर बिना पीयूसीसी जांच के ही वाहनों में ईंधन भरा गया। कहीं कर्मचारियों ने प्रमाणपत्र मांगा तक नहीं। वहीं, कुछ पंपों पर वाहन नंबर से पीयूसीसी की वैधता जांचने की व्यवस्था भी नहीं मिली। गौरतलब है कि नियम के अनुसार वैध पीयूसीसी के बिना वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाना है। एएनपीआर कैमरों से नंबर प्लेट स्कैन कर ऑनलाइन पीयूसीसी की वैधता जांची जानी है। कैमरे चालू होने तक मैन्युअल जांच के निर्देश हैं। लेकिन जिले के करीब 116 पेट्रोल पंपों पर कैमरा आधारित व्यवस्था अब तक चालू नहीं हो सकी है।
सुबह 11 बजे, नीलम-बीके रोड।
पेट्रोल पंप पर वाहन चालक सामान्य तरीके से पेट्रोल भरवाते मिले। कर्मचारियों ने न पीयूसीसी मांगा और न ही इसकी वैधता जांची। बिना किसी पूछताछ के वाहनों में ईंधन भरा गया।
दोपहर एक बजे, अजरौंदा चौक।
यहां भी हालात अलग नहीं मिले। पेट्रोल लेने पहुंचे वाहन चालकों से पीयूसीसी के बारे में कोई सवाल नहीं किया गया। ईंधन की बिक्री सामान्य दिनों की तरह चलती रही।
दोपहर तीन बजे, एनआईटी-5।
यहां भी वाहन में पेट्रोल भरने से पहले पीयूसीसी की जांच नहीं हुई। मौके पर ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नियम के पालन की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई।
शाम सात बजे, अजरौंदा मेट्रो स्टेशन।
यहां भी वाहन चालकों को आसानी से पेट्रोल मिलता रहा। किसी से पीयूसीसी दिखाने को नहीं कहा गया और न ही वाहन नंबर के जरिए इसकी वैधता जांची गई। सभी पेट्रोल पंपों पर नो पीयूसीसी, नो फ्यूल का बोर्ड भी नजर नहीं आया।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
एनआईटी-5 के पंप मैनेजर राज कुमार ने बताया कि उनके सेक्टर-3 और सेक्टर-22 स्थित पंपों पर भी फिलहाल बिना पीयूसीसी जांच के ईंधन दिया जा रहा है। राज कुमार ने बताया कि अभी तक हमारे पास कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
आरटीओ मुनीश सहगल ने कहा कि एएनपीआर कैमरों और ईंधन बिक्री को पीयूसीसी से जोड़ने के संबंध में मुख्यालय से स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। निर्देश मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
फरीदाबाद पेट्रोलियम एसोसिएशन के उपप्रधान आदर्श दीवान ने कहा कि पीयूसीसी जांच के लिए पेट्रोल पंप संचालकों को कोई अधिकार या स्पष्ट आदेश नहीं मिला है। जांच करने पर कई बार ग्राहक विवाद करने लगते हैं, जिससे कर्मचारियों को परेशानी होती है।
116 कैमरों की योजना, पंपों पर इंतजार : जिले में करीब 116 पेट्रोल पंप हैं और इन पर रोजाना हजारों वाहन ईंधन लेने पहुंचते हैं। जिले में करीब 18 लाख वाहन हैं। इन वाहनों की नंबर प्लेट पहचान और पीयूसीसी सत्यापन के लिए 116 एएनपीआर कैमरे लगाए जाने की योजना है। मगर पंप संचालकों का कहना है कि उन्हें कैमरे लगाने और तकनीकी व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। रविवार तक किसी पेट्रोल पंप पर न कैमरे नजर आए और न ही कर्मचारियों को यह स्पष्ट बताया कि पीयूसीसी की जांच किस तकनीक या प्रणाली से होगी।
आठ महीने में 4558 चालान, फिर भी इंतजाम अधूरे : यातायात पुलिस ने जिले में पीयूसीसी नियमों के उल्लंघन पर पिछले आठ माह में 4558 वाहनों के चालान किया है। इसके बावजूद अब बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल देने से रोकने की व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
पिछले एक सप्ताह में तीसरी बार पेट्रोल लेने आ चुके हैं। अभी तक तो किसी प्रकार की कोई चेकिंग नहीं देखने को मिली है।- बंसीलाल, पेट्रोल खरीदार
सभी लोग आराम से पेट्रोल भरा रहे है, कोई भी चेकिंग नहीं है। बिना किसी परेशानी के पेट्रोल मिल रहा है। नियम आया है, पर कब तक जिले में लागू होगा यह नहीं कहा जा सकता है। यदु कुमार, पेट्रोल खरीदार