दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को जरूरी मेडिकल इलाज बिना देरी के उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व चेयरमैन ई. अबुबकर को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि उन्हें सभी जरूरी मेडिकल इलाज बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाए।न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि हालांकि अबुबकर कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, लेकिन उन्हें उचित मेडिकल इलाज का अधिकार है। अदालत ने इस सप्ताह उन्हें सेकंड मेडिकल ओपिनियन लेने के लिए निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति दे दी है।
न्यायाधीश ने आदेश दिया कि जब भी अबुबकर को अस्पताल ले जाया जाए चाहे इमरजेंसी में ही क्यों न हो उनकी परिवार वालों को तुरंत सूचना दी जाए। साथ ही उनके बेटे को निजी अस्पताल में मेडिकल जांच के दौरान मौजूद रहने की अनुमति दी गई है। 27 मार्च को दिए गए फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि अबुबकर का इलाज एम्स में ही जारी रहेगा। अबुबकर ने अपनी याचिका में मांग की थी कि उन्हें अपनी लागत पर जेल से किसी सुसज्जित मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए और उनके इलाज में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न हो। उन्होंने एक परिवार के सदस्य को अटेंडेंट के रूप में अपने साथ रखने की भी अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि अबुबकर को पहले से ही सरकारी अस्पतालों डीडीयू अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल और एम्स में इलाज मिल रहा है। एम्स जैसा सर्वसाधन संपन्न मेडिकल संस्थान उनकी चिकित्सकीय जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा, पिछले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इलाज एम्स में ही होना है और पिछले बेंच के आदेश से केवल सेकंड ओपिनियन लेने की अनुमति दी गई थी। इसलिए निजी अस्पताल में इलाज की मांग में कोई दम नहीं है।