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तैयार रहें, आपको भी बनना पड़ेगा खतरों का खिलाड़ी

Fri, 31 Jan 2014 09:20 PM IST
योगेश शर्मा/ अमर उजाला, नोएडा
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नोएडा में रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों को आने वाले समय में भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है, क्योंकि नोएडा डिपो की 50 फीसदी बसें अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई हैं।
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इसी साल डिपो की तकरीबन आधी बसें रिटायर हो जाएंगी। लिहाजा डिपो के बेड़े में अगर नई बसें न जुड़ीं तो यात्रियों को जान हथेली पर रखकर इन्हीं बसों में सफर करना होगा।

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यूपी रोडवेज के नोएडा डिपो का बेड़ा 161 बसों का है। इनमें से तीन बसें लंबे समय पहले ही जलकर ढांचे में तब्दील हो चुकी हैं। शेष 158 बसों में से 79 बसें अपनी समयसीमा और किलोमीटर पूरे करने वाली हैं।
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रोडवेज प्रबंधन के मुताबिक 9 बसें ऐसी हैं जो अगले कुछ दिनों में ही रिटायर घोषित हो जाएंगी, जबकि 70 बसें साल के अंत तक रिटायर होंगी। रिटायर घोषित करने के बाद बसों की नीलामी का प्रावधान है। यदि नीलामी हुई तो नोएडा डिपो का 158 बसों का बेड़ा सिमटकर 79 बसों का ही रह जाएगा, लेकिन यदि इन बसों की नीलामी नहीं हुई तो जर्जर बसों में सफर करना यात्रियों की मजबूरी होगी।

क्या कहता है नियम
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के नियमानुसार किसी भी रोडवेज बस का संचालन छह साल और आठ लाख किलोमीटर तक किया जा सकता है। इसके बाद बस को रिटायर घोषित करके नीलाम करने का प्रावधान है।

व्यवस्था पर एक नजर
नोएडा डिपो से संचालित हो रही बसें प्राधिकरण की हैं, लेकिन संचालन यूपी रोडवेज कर रहा है। डिपो के बेड़े में 146 बसें वर्ष 2006 में जुड़ी थीं, जबकि 15 बसें वर्ष 2009 के बाद आई थीं। बसों का संचालन सिटी के अलावा दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, हरिद्वार, कोटद्वार और आगरा-मथुरा के बीच किया जा रहा है।

कब मिलेंगी 170 बसें
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई साल से एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल) योजना पर काम चल रहा है। योजना के तहत 170 बसों का संचालन किया जाना है, लेकिन यह योजना फाइलों से बाहर निकलने का नाम नहीं ले रही है।
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