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Delhi News: पहली से पांचवीं तक औपचारिक परीक्षा नहीं, आकलन के आधार पर मिलेगा ग्रेड

Thu, 24 Aug 2023 02:36 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आकलन में लिखित परीक्षा के बजाय शिक्षक कक्षा में छोटे-छोटे वर्कशीट पर टेस्ट और अपने आकलन के आधार पर छात्रों को ग्रेड देंगे। पांचवीं कक्षा तक छात्रों को खेल-खेल में भाषा, गणित, मानवीय मूल्य, भारतीय परपंरा, दुनिया के घटनाक्रम से जोड़ेंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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स्कूलों में नर्सरी, केजी, एलकेजी स्कूली शिक्षा का हिस्सा होंगे लेकिन पहली कक्षा से छात्र पहली बार किताब देखेंगे। पहली और दूसरी कक्षा के छात्र सिर्फ दो किताबें भाषा और गणित विषय की पढ़ेंगे। पहली से पांचवीं कक्षा तक औपचारिक परीक्षा की बजाय आकलन होगा। आकलन के आधार पर ग्रेड दिया जाएगा।

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आकलन में लिखित परीक्षा के बजाय शिक्षक कक्षा में छोटे-छोटे वर्कशीट पर टेस्ट और अपने आकलन के आधार पर छात्रों को ग्रेड देंगे। पांचवीं कक्षा तक छात्रों को खेल-खेल में भाषा, गणित, मानवीय मूल्य, भारतीय परपंरा, दुनिया के घटनाक्रम से जोड़ेंगे। वहीं तीसरी, चौथी और पांचवीं कक्षा के छात्रों को भाषा, विज्ञान, गणित, शारीरिक शिक्षा के साथ लिखने, पढ़ने और बोलने में माहिर किया जाएगा। इन तीन कक्षाओं में गणित और भाषा पर विशेष रूप से काम होगा। कक्षा, उम्र के आधार पर हर विषय पर आकलन होगा और कमियों को दूर किया जाएगा।

छठवीं से आठवीं कक्षा में लिखित परीक्षा पर जोर
छठवीं से आठवीं कक्षा में पहली बार लिखित परीक्षा पर जोर होगा। यहां शिक्षक कक्षा में विषयों पर विस्तार से पढ़ाई करवाएंगे। यहां पर विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, वोकेशनल एजुकेशन विषयों को जोड़ा जाएगा। यहां आकलन के साथ-साथ लिखित परीक्षा पर भी जोर होगा। इसमें छात्रों की कक्षा और उम्र के आधार पर समझ तथा ज्ञान को भी परखा जाएगा।

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अब 12वीं नहीं, 9वीं से भविष्य बनाने में मिलेगी मदद
9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं को सेकंडरी स्टेज में रखते हुए दो भागों में बांटा गया है। इसमें कई बड़े बदलाव किए गए हैं। कक्षा 10वीं को पूरा करने के लिए छात्रों को कक्षा नौंवी और 10वीं के दो वर्षों में कुल आठ-आठ पाठ्यक्रम में से प्रत्येक से दो आवश्यक पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे। उदाहरण के तौर पर अभी 10वीं बोर्ड परीक्षा के छात्रों को कम से कम पांच विषयों की पढ़ाई करनी होती है लेकिन नए नियमों में आठ विषयों को रखा गया है। इसमें ह्यूमैनाटिज, मैथ्मेटिक्स व कंप्यूटिंग, वोकेशनल एजुकेशन, फिजिकल एजुकेशन, आर्ट्स एजुकेशन, सोशल साइंस, साइंस और इंटर डिसिप्लिनरी है। वहीं, 11वीं और 12वीं कक्षा में छात्रों को अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए विषय चुनने की आजादी मिलेगी। 
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12वीं कक्षा तक छात्रों को 16 मनपसंद कोर्स की पढ़ाई करनी अनिवार्य रहेगी। इसका अर्थ है कि अब छात्र को कक्षा नौवीं से अपने भविष्य को लेकर तैयारी शुरू करनी होगी। उसे सभी विषयों के बारे में पढ़ाया जाएगा ताकि वह 12वीं के बाद किस क्षेत्र में भविष्य बनाना है, उसमें उलझन न हो। दरअसल, ह्यूमैनाटिज में लैंग्वेज, लिटरेचर और फिलॉस्फी होगी। जबकि सोशल साइंस में हिस्ट्री, जियोग्राफी, पॉलिटिकल साइंस, इकनॉमिक्स तो साइंस में फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलॉजी की पढ़ाई करनी होगी। वहीं, मैथ्मेटिक्स और कंप्यूटिंग में मैथ्स, कंप्यूटरसाइंस, बिजनेस मैथ्मेटिक्स तो ऑटर्स में म्यूजिक, डांस, थियेटर, पेंटिंग, वोकेशनल में कौशल विकास के कोर्स, स्पोर्ट्स में गेम्स, योगा की जानकारी मिलेगी। इंटरडिसिप्लिनरी में कॉमर्स, हेल्थ, मीडिया, कम्यूनिटी साइंस, नॉलेज ऑफ इंडिया, लीगल स्ट्डीज आदि के बारे में पढ़ना होगा।

11वीं में भविष्य के आधार पर तीन क्षेत्र में से चुनने का विकल्प
मेडिकल, इंजीनियरिंग क्षेत्र में भविष्य बनाने को लेकर अक्सर छात्र तनाव में रहते हैं। इसी कारण महंगी कोचिंग के बाद भी छात्र असफलता के डर से अपना जीवन समाप्त कर देते हैं। इन्हीं दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए नौंवी कक्षा से 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि छात्र स्वयं तय कर सकें कि उन्हें किस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना है। दसवीं कक्षा तक विभिन्न विषयों को पढ़ने और विस्तार से जानने के बाद उसे 11वीं कक्षा में तीन विकल्प मिलेंगे। वर्ग एक में ह्यूमैनाइटीज, सोशल साइंस, साइंस, मैथ्मेटिक्स और कंप्यूटिंग विषय होंगे। दूसरे वर्ग में इंटरडिसिप्लिनरी एरिया होगा, जो स्नातक के बाद रिसर्च एरिया में भविष्य बनाना चाहते होंगे। तीसरे वर्ग में ऑटर्स, स्पोर्ट्स और वोकेशनल को चुनने का विकल्प मिलेगा।
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