ऐसे पकड़े गए तीनों आरोपी
बैंक खाते की पड़ताल के बाद पुलिस को पता चला कि जिस खाते में रकम गई है, वह असम में किसी असीकुर रहमान नामक व्यक्ति के नाम पर है। जांच के बाद पुलिस ने असीकुर को असम से दबोच लिया। इससे पूछताछ के बाद दूसरे आरोपी धर्मेश को भी असम से गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों से पूछताछ के बाद मुख्य आरोपी की जानकारी जुटाई गई। टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पता चला कि मुख्य आरोपी सुमंत्रा गुप्ता पश्चिम बंगाल स्थित अपने घर पर मौजूद है। एक टीम को वहां भेजा गया, लेकिन आरोपी भागने में कामयाब हो गया। खासी मशक्कत के बाद उसे दबोच लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने ठगी में अपना हाथ होने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस को मामले में उसकी सहयोगी नगमा खान की तलाश है।
ऐसे की जाती थी
मुख्य आरोपी डॉ. सुमंत्रा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2005 में उसने अपना एमबीबीएस पूरा किया था। अब वह अपना नर्सिंग होम चला रहा था। नीट के आने से पहले वह नगमा खान नामक महिला के साथ मिलकर कमीशन पर एमबीबीएस में दाखिला करवाते थे, लेकिन बाद में दाखिलों में दिक्कत होने लगी तो उन्होंने सीधे ठगी शुरू कर दी। आरोपी सुमंत्रा खुद को कटिहार मेडिकल कॉलेज का डीन या प्रिंसिपल बताता था। धर्मेश ठगी की रकम के लिए खातों का इंतजाम करता था, जबकि असीकुर रहमान ने 35 हजार रुपये में धर्मेश को अपना खाता उपलब्ध करवाया था।