डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएं
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स्वच्छता व स्वस्थ रहने का मूलमंत्र देने वाले योग के जरिये सैकड़ों लोगों ने सेक्टर-123 में बन रहे कचरे घर का विरोध किया। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, किसान व किन्नरों ने मुंह पर मास्क लगाकर पंचायत स्थल पर योग किया। इस दौरान लोगों ने अपने चेहरों को प्रधानमंत्री मोदी के मास्क से ढक रखा था।
वहीं, कुछ बच्चों ने ऑक्सीजन सिलेंडर और मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगाकर विरोध जताया। सुबह 6 बजे से यहां योग शुरू किया गया। विरोधी नारेबाजी के बीच लोगों ने कचरा योग, कचरा आसन, बदबू आसन, सड़न आसन के अलावा रोगी आसन कर अपना विरोध जताया।
यही नहीं इसकी एक वीडियो बनाई गई। जिसे पीएमओ आफिस व शासन को भेज दिया गया। ताकि जनप्रतिनिधियों को यह पता चल सके कि यहां भविष्य में हाल क्या होगा।
इस मौके पर किसान विकास संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने कहा कि अंधी बहरी सरकार को यह एक संदेश है कि एक तरफ जहां आप स्वच्छ भारत अभियान के नाम का ढिंढोरा पीट रहे हो और संपूर्ण विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है।
वहां लाखों लोगों के बीच बन रहे कूड़े घर के पास में योग करना कैसे संभव है। डंपिंग ग्राउंड संघर्ष समिति के नेता सूबे यादव ने कहा कि यह आंदोलन तभी रुकेगा जब प्राधिकरण डंपिंग ग्राउंड को यहां से हटाने का फैसला लेगा।
योग क्लास पूरी होने के बाद महिलाओं व लोगों ने पर्थला चौक पर उग्र प्रदर्शन किया। वह सड़कों पर लेट गए। उन्होंने चक्का जाम कर दिया। वाहनों की आवाजाही को रोक दी गई।
काफी समझाने के बाद भी वह सड़कों से नहीं हटे। ऐसे में गाजियाबाद, ग्रेटर-नोएडा वेस्ट व नोएडा की ओर लंबा जाम लग गया। लोगों को घंटों तक जाम का सामना करना पड़ा। पुलिस प्रशासन द्वारा काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया। जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका।
24 को आ सकते हैं राजबब्बर
कांग्रेस नेता राम कुमार तंवर ने बताया कि गुरुवार को दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष राजब्बर से मिलने गए थे। उन्हें डंपिंग ग्राउंड की समस्या से भी अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि वह 24 जून रविवार को नोएडा आ सकते हैं।
मालूम हो कि जब आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था तो सांसद पीएल पुनिया समेत अन्य कांग्रेसी यहां पर आए थे।
दरअसल, कूड़े पर शहर में काफी दिन से बवाल चल रहा है। पहले सेक्टर-137 में कूड़ा डाला जा रहा था। वहां एनजीटी की ओर से रोक लगाने के बाद सेक्टर-54 में कूड़ा डंप किया जाने लगा। बीच में यहां लगी रोकथाम के बाद सेक्टर-68 में कूड़ा डाला गया, लेकिन वहां केवल 10 दिन के लिए कूड़ा डाला गया।
इसके बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सेक्टर-54 में एक बार फिर प्राधिकरण ने कूड़ा डालना शुरू कर दिया है। इसी बीच कुछ लोग एनजीटी चले गए और वहां से सेक्टर-54 में कूड़ा नहीं डालने का आदेश ले आए।
इसके बाद प्राधिकरण के पास अब फिलहाल कोई विकल्प नहीं बचा है। अधिकारियों का कहना है कि सेक्टर-123 में प्राधिकरण की अपनी जमीन है, जहां लैंडफिल साइट बननी है। साथ ही वेस्ट टू एनर्जी प्लांट भी बनाया जाना है, लेकिन अब कूड़े को कहीं न कहीं तो डालना ही होगा। लिहाजा सेक्टर-123 के अलावा कोई और स्थान नहीं दिख रहा है।
सेक्टर-123 में नोएडा प्राधिकरण के कूड़ा डालने का विरोध स्थानीय लोगों ने शुरू किया था। यह अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। आलम यह है कि इसके विकल्पों पर कोई भी नहीं बोलना चाहता।
मंगलवार को नोएडा प्राधिकरण, केंद्रीय मंत्री और स्थानीय विधायक के साथ हुई बैठक बेनतीजा रहने की वजह से मामला और गंभीर हो गया है। वजह यह कि बैठक बेनतीजा होने की वजह से और बड़ा प्रदर्शन होने की बात कही जा रही है। कूड़े के निपटारे का क्या विकल्प हो सकता है इस पर लगातार मंथन चल रहा है। हालांकि कोई भी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच सका है।
सेक्टर-123 में कूड़ा डालना बंद होेने पर क्या होगा?
जैसी से सेक्टर-123 में कूड़ा डालना बंद होगा। वैसे ही पूरे शहर में कूड़े पर कोहराम शुरू हो जाएगा। क्योंकि सेक्टर-54 में जब कूड़ा डालना बंद हुआ था तो शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए थे। यही वजह है कि कोई भी नेता या अधिकारी इस मामले में आगे नहीं आना चाहता।
सेक्टर-151 ए का विकल्प भी इतना नहीं आसान
सेक्टर-151ए में अगर कूड़ा डालने का फैसला ले भी लिया जाता है तो यह प्राधिकरण के लिए एकदम से आसान फैसला नहीं होगा। वहां भी 500 मीटर पर आबादी है। यही नहीं वहां लैंडफिल साइट और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए कागजी कार्रवाई में भी काफी समय लगने की बात कही जा रही है।