दिल्ली में विधानसभा चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा ने दिल्ली चुनावों को लेकर अपना पक्ष साफ कर दिया है। रविवार को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ये फैसला लिया गया कि पार्टी दिल्ली में जोड़तोड़ की सरकार बनाने के बजाय चुनाव में जाना अधिक पसंद करेगी।
इसके बाद दिल्ली की सियासत पर हाईवोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। सभी पार्टियों की ओर राजनैतिक बयानबाजी के दौर में सबसे चौंकाने वाली बात अरविंद केजरीवाल ने की है। उनके अनुसार एलजी को भाजपा के बाद आप को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए।
इससे पहले सोमवार सुबह प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने एलजी से मिलकर दिल्ली सरकार को लेकर अपना रुख साफ किया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपाध्याय ने एलजी को एक चिट्ठी सौंपी है, जिसमें दिल्ली में सरकार बनाने में अक्षम होने की बात की गई है।
हालांकि पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए उपराज्यपाल ने सोमवार शाम सात बजे तीनों दलों बुलाया है। माना जा रहा है कि अब दिल्ली में विधानसभा चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।
केजरीवाल को समर्थन नहीं देंगी कांग्रेस
दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर भाजपा के इनकार करने और आम आदमी पार्टी की ओर से फिर सरकार बनाने को लेकर रुचि दिखाने को लेकर एक बार फिर दिल्ली में कांग्रेस की भूमिका अहम हो गई है।
दरअसल, भाजपा ने जैसे ही दिल्ली में सरकार बना पाने में अक्षमता दिखाई केजरीवाल ने मौके की नजाकत समझते हुए एलजी से अपनी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाने की बात कह दी। इससे ये समझा जाने लगा कि आप दिल्ली में दोबारा सरकार बनाने के मूड में है, लेकिन बिना कांग्रेस समर्थन के यह आसान नहीं होगा।
लेकिन कांग्रेस ने ऐसा करने से मना कर दिया है। कांग्रेस ने दोबारा आप को समर्थन न करने फैसला लिया है। कांग्रेस विधायक दल के नेता हारुन युसुफ ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी दिल्ली में चुनाव के लिए तैयार है। वरिष्ठ कांगेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, प्रवक्ता मुकेश शर्मा व पूर्व सांसद जेपी अग्रवाल ने भी दिल्ली में चुनाव में जाने की इच्दा जताई है।
अब उपचुनावों का क्या होगा?
दिल्ली की तीन सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इसके लिए न केवल अधिसूचना जारी हो चुकी है, बल्कि नामांकन के लिए पांच दिन बीत भी चुके हैं। यही नहीं, पार्टियों ने इस पर गंभीरता से सोचना भी शुरू कर दिया था।
लेकिन सोमवार को अचानक भाजपा के बदले मूड ने अब इसे अधर में लटका दिया है। अगर दिल्ली में विधानसभा चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा, तो उपचुनावों को रद्द कर दिया जाएगा।
हालांकि अभी किसी भी पार्टी ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी, न किसी अन्य प्रत्याशी ने नामांकन कराया था। इस स्थिति में उपचुनाव को रद्द करने में अधिक माथापच्ची नहीं करनी पड़ेगी।