दिल्ली की छह जिला अदालतों में जजों के खाली पदों के लिए कोर्ट रूम का अभाव है। यह जानकारी हाईकोर्ट खंडपीठ को प्रशासनिक विभाग के अधिकारियों ने दी।
न्यायिक सेवा में चुने गए उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रशासनिक विभाग की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने बताया कि जिला अदालतों में न्यायिक सेवा के खाली पड़े पदों को कमरों के अभाव के अलावा आधारभूत ढांचा संबंधी अन्य समस्याओं के चलते नहीं भरा जा सकता।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आरके कपूर ने कहा कि न्यायिक सेवा ने सलील महेश्वरी समेत छह लोगों के मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है। इन लोगों का चयन न्यायिक सेवा के लिए हुआ था लेकिन इनकी नियुक्ति नहीं की गई।
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न्यायिक सेवा में चुने गए उम्मीदवारों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 2009 में जिला अदालतों में जजों के 50 पद रिक्त होने का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। हालांकि उस समय जजों के 100 पद खाली थे।
याचिका में कहा गया है कि परीक्षा के बाद 50 पदों पर नियुक्ति के लिए केवल 32 उम्मीदवारों को चुना गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2013 को उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राजधानी की छह जिला अदालतों में जजों के लिए केवल 22 कोर्ट रूम थे।