देश के आम बजट से नोएडा के किसान निराश हुए हैं। शहर के लिए जमीन चली जाने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार में बजट में किसानों को भत्ता या पेंशन और पुनर्वास के लिए कोई नीति बनाएगी, मगर बजट में ऐसा कुछ भी नहीं मिला।
हालांकि भाजपा किसानों को सात प्रतिशत के न्यूनतम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध क राने के निर्णय की सराहना करते नहीं थक रही। किसानों ने अमर उजाला से अपनी राय जाहिर की:
-इस बजट में किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। किसानों को ब्याज पर कर्ज देने के बजाय अगर उनको कृषि उत्पाद की सही कीमत दिलाने का इंतजाम किया जाता तो ज्यादा बेहतर होता।
राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन
-किसानों की जमीन चली गई है। उनको जीविका साधन उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस निर्णय होना चाहिए था, मगर सरकार को सिर्फ कार्पोरेट का ख्याल है। चीनी मिलों से पैसा दिलाने का भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
अजयपाल शर्मा, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
-सरकार ने एक बात जरूर अच्छी कही है कि हर गांवों को शहर की तरह विकसित किया जाएगा। ऐसा होने से गांवों का शहर की तरफ पलायन रुकेगा और शहर और गांव की खाई को पाटा जा सकेगा। गांवों में रोजगार के भी साधन बढ़ सकेंगे। लेकिन सरकार को सच्चाई से इस पर अमल करना होगा।
अजय चौधरी, किसान नेता
-गांवों के मकानों पर बैंक कर्ज दिलाने के लिए कोई ठोस घोषणा की जानी चाहिए थी। किसानों की जमीन पर बसे सेक्टरों पर कर्ज देते हैं, मगर किसानों को नहीं। शहरों की तरह गांवों को भी सुविधा संपन्न बनाने के लिए कोई घोषणा नहीं की गई।
रघुराज सिंह, कांग्रेसी नेता
-सात प्रतिशत की न्यूनतम ब्याज दर पर किसानों को कर्ज देने का फैसला सराहनीय है। किसानों को समय पर कर्ज मिल सकेगा। उत्पादन की स्थिति सुधरेगी, जिससे अर्थव्यवस्था में भी सुधार होगा।
नवाब सिंह नागर, पूर्व विधायक भाजपा