आईटीआई गुड़गांव के एक छात्र की मौत का शासन प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ रहा। बीते 11 दिसंबर को सिटी बस से कुचलकर मौत हो गई थी।
इसके खिलाफ छात्रों का आक्रोश भड़का और उन्होंने प्रशासन पर हादसे के शिकार छात्र के परिजनों उचित मुआवजा दिलाने का दबाव बनाया था।
वहीं दोषी चालक के खिलाफ कार्रवाई और महिला कॉलेज आईटीआई के बीच बस क्यू शेल्टर बनाने की भी मांग की गई थी। इनमें से अभी तक प्रशासन ने कोई भी मांग नहीं मानी।
आईटीआई गुड़गांव के छात्र की हादसे में मौत पर आंदोलन करने वाले छात्रों ने अचानक चुप्पी साध ली है। इस आंदोलन का नेतृत्व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) ने किया था। वह भी अब शांत हो गए हैं।
हादसे के बाद छात्रों ने रोडवेज की बसों को नुकसान पहुंचाया था। इस मामले में पुलिस ने कुछ छात्रों को गिरफ्तार भी किया था। आंदोलनरत छात्रों की प्रशासन से मांग थी कि उनके खिलाफ दर्ज मामला हो। हालांकि उन सभी को जमानत तो मिल गई है पर मामला वापस नहीं हुआ।
आंदोलन की अगुवाई करने वाले एबीवीपी गुड़गांव के विभागीय संयोजक सतीश चौधरी ने कहा कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। प्रशासन मुआवजे के लिsए फाइल आगे बढ़ा चुका है।
अगर अगर 10 दिनों में मुआवजा नहीं दिया जाता और बस क्यू शेल्टर बनीं बनाया गया तो तो छात्र एक बार फिर सड़क पर उतर आएंगे।
नगर निगम के चीफ इंजीनियर बीएस सिंगरोहा ने बताया कि रोडवेज की ओर से जो स्थान चिन्हित कर उन्हें दिया गया था। उस पर निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं जिन स्थानों पर यह नहीं है उनका निर्माण दूसरे चरण में किया जाएगा।