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हजरत निजामुद्दीन गद्दीनशीं के गायब होने का मामला: बीमार बहन को देखने कराची गये थे वो

Sat, 18 Mar 2017 09:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दबी जुबान में कट्टपंथियों पर जताया शक, परिवार वालों ने भारत और पाक एजेंसियों पर पूरा भरोसा जताया 

-दबी जुबान में कट्टपंथियों पर जताया शक, परिवार वालों ने भारत और पाक एजेंसियों पर पूरा भरोसा जताया
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विस्तार
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हजरत निजामुद्दीन दरगाह के गद्दीनशीं आसिफ निजामी कराची में रहने वाली अपनी बीमार बहन को देखने गये थे। परिवार वालों के मुताबिक बहन के पास सात दिन रहने के बाद आसिफ निजामी अपने साथ गये भतीजे नाजिम अली निजामी के साथ लाहौर में दो दरगाहों की जायरत (दर्शन) किया।
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लेकिन वहां से आने के बाद दोनों रहस्यमयी परिस्थिति में गायब हो गये। तीन दिन बीत जाने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार वालों को कट्टरपंथियों पर शक है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों की एजेंसियां उनकी तलाश करने में सफल होगी।

जानकारी के मुताबिक आसिफ अली निजामी (82) अपने परिवार के साथ निजामुद्दीन इलाके में रहते हैं। परिवार में पत्नी और चार बेटे हैं। वहीं भतीजे सैयद नाजिम अली निजामी(62) पड़ोस में ही पत्नी और तीन बेटों के साथ रहते हैं।
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दरगाह गद्दीनशीं के बेटे आमिर निजामी ने बताया कि उनके पिता की छोटी बहन कमरजहां (90) पाकिस्तान के कराची में रहती है। वह काफी समय से बीमार है। जिनका हालचाल जानने के लिए आसिफ अपने भतीजे के साथ छह मार्च की शाम दिल्ली से कराची के लिए रवाना हुए थे। उनको 20 मार्च को वापस भारत आना था।

करीब सात दिन अपनी बहन के घर पर रूकने के बाद दोनों लाहौर स्थित दो दरगाहों पर जायरत करने के लिए निकल गए। 13 मार्च की सुबह दोनों बाबा फरीद गंजशकर दरगाह की जायरत की। 14 मार्च की सुबह उन्होंने दाता दरबार दरगाह में चादर चढ़ाई।

परिवार वालों के मुताबिक अगले दिन जब वह कराची जाने के लिए हवाई अड्डा पर पहुंचे तो नाजिम निजामी को कुछ कागजातों की जांच पूरी करने के लिए रोक लिया गया। जबकि आसिफ को विमान पर सवार होने के लिए कहा।

15 मार्च को आसिफ निजामी ने अपने भांजे वसीम निजामी को फोन कर बताया कि वह कराची हवाई अड्डे पर हैं जबकि नाजिम को लाहौर में ही रोक लिया गया है। उसके बाद वसीम ने आसिफ से संपर्क करने की कोशिश की तो उनका फोन बंद हो गया। वसीम ने इस बात की जानकारी उनके परिवार वालों को दी।
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जुम्मे की नवाज के बाद लोगों ने की सलामती की दुआ 

nizamuddin
दोनों गद्दीनशीं के गायब होने के तीन दिन बाद भी पाक और भारत की जांच एजेंसियों को उनका सुराग नहीं मिल पाया है। इनके गायब होने के बाद से हजरत निजामुद्दीन दरगाह में गम का माहौल बना हुआ है। जुम्मे की नमाज पढने के बाद दरगाह में मौजूद लोगों ने दोनों मौलवियों की सलामती के लिए दुआएं मांगी। 

बेटे की अंतिम बार व्हाट्सएप्प पर हुई थी बात 
आमिर निजामी ने बताया कि गत 12 मार्च की रात करीब 11 बजे आखिरी बार उसकी पिता से व्हाट्सएप्प पर बातचीत हुई थी। उन्होंने तीस साल बाद अपनी बहन से मिलकर काफी खुश थे। उन्होंने कहा कि उनकी ख्वाहिश पूरी हो रही है। आमिर के मुताबिक उसके पिता की ख्वाहिश थी कि वह गुरु बाबा फरीदगंज शकर और दाता दरबार की दरगाह पर जाए। 

कट्टरपंथियों पर शक 
परिवार वालों को दोनों गद्दीनशीं के गायब होने में कट्टरपंथियों के हाथ होने का शक है लेकिन परिवार वाले इस बारे में खुलकर नहीं बोल रहे हैं। उनके मुताबिक भारत और पाक एजेंसियां मसले का हल जरूर निकालेंगे। गौरतलब है कि पाकिस्तान में 22 जून 2016 को कट्टरपंथियों ने दाता दरबार में कव्वाली गाने वाले अमजद साबरी की निर्मम हत्या कर दी थी। इससे पूर्व वर्ष 2010 में कट्टरपंथियों ने लाल शाहबाज मस्त कलंदर दरगाह में हमला कर 72 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस बात को लेकर पाकिस्तान की सरकार भी काफी चितिंत है।
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