हजरत निजामुद्दीन दरगाह के गद्दीनशीं आसिफ निजामी कराची में रहने वाली अपनी बीमार बहन को देखने गये थे। परिवार वालों के मुताबिक बहन के पास सात दिन रहने के बाद आसिफ निजामी अपने साथ गये भतीजे नाजिम अली निजामी के साथ लाहौर में दो दरगाहों की जायरत (दर्शन) किया।
लेकिन वहां से आने के बाद दोनों रहस्यमयी परिस्थिति में गायब हो गये। तीन दिन बीत जाने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार वालों को कट्टरपंथियों पर शक है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों की एजेंसियां उनकी तलाश करने में सफल होगी।
जानकारी के मुताबिक आसिफ अली निजामी (82) अपने परिवार के साथ निजामुद्दीन इलाके में रहते हैं। परिवार में पत्नी और चार बेटे हैं। वहीं भतीजे सैयद नाजिम अली निजामी(62) पड़ोस में ही पत्नी और तीन बेटों के साथ रहते हैं।
दरगाह गद्दीनशीं के बेटे आमिर निजामी ने बताया कि उनके पिता की छोटी बहन कमरजहां (90) पाकिस्तान के कराची में रहती है। वह काफी समय से बीमार है। जिनका हालचाल जानने के लिए आसिफ अपने भतीजे के साथ छह मार्च की शाम दिल्ली से कराची के लिए रवाना हुए थे। उनको 20 मार्च को वापस भारत आना था।
करीब सात दिन अपनी बहन के घर पर रूकने के बाद दोनों लाहौर स्थित दो दरगाहों पर जायरत करने के लिए निकल गए। 13 मार्च की सुबह दोनों बाबा फरीद गंजशकर दरगाह की जायरत की। 14 मार्च की सुबह उन्होंने दाता दरबार दरगाह में चादर चढ़ाई।
परिवार वालों के मुताबिक अगले दिन जब वह कराची जाने के लिए हवाई अड्डा पर पहुंचे तो नाजिम निजामी को कुछ कागजातों की जांच पूरी करने के लिए रोक लिया गया। जबकि आसिफ को विमान पर सवार होने के लिए कहा।
15 मार्च को आसिफ निजामी ने अपने भांजे वसीम निजामी को फोन कर बताया कि वह कराची हवाई अड्डे पर हैं जबकि नाजिम को लाहौर में ही रोक लिया गया है। उसके बाद वसीम ने आसिफ से संपर्क करने की कोशिश की तो उनका फोन बंद हो गया। वसीम ने इस बात की जानकारी उनके परिवार वालों को दी।