पश्चिम बंगाल की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी अपने पिता के साथ निठारी में रहती थी। वह अपनी मां के साथ घरों में मेड का काम करती थी। 15 मार्च, 2005 को सुबह 11 बजे वह घर आई और उसकी मां दूसरी नौकरी देखने के लिए किसी के घर गई थी। महिला शाम चार बजे घर लौटी तो देखा कि बेटी गायब है। उसके पिता ने 16 मार्च, 2005 को नोएडा सेक्टर-20 थाने में तहरीर देते हुए बताया कि उसकी बेटी गायब है, जिसकी गुमशुदगी दर्ज की जाए।
इस मामले में पुलिस ने पांच अप्रैल 2005 को रिपोर्ट दर्ज करते हुए जांच शुरू की। उसके बाद निठारी की डी-5 कोठी में खुदाई के दौरान किशोरी के कपड़े, चप्पल और अन्य सामान बरामद हुए थे। इसमें किशोरी के दांत के डीएनए का मिलान उसकी मां के डीएनए से होने के बाद पहचान हुई थी।
इस मामले में सीबीआई ने 11 जनवरी 2007 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। नौ अप्रैल, 2008 को सीबीआई ने चार्जशीट पेश की थी। मुकदमे में कुल 270 दिन की तारीख लगी, जिसके बाद अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 38 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से केवल दस्तावेज दिए गए।
किन-किन मामलों में हुई फांसी की सजा
- 13 सिंतबर 2009 को एक बच्ची की हत्या के मामले में कोली-पंधेर को फांसी
- 12 मई 2010 को एक बच्ची की हत्या के मामले में कोली को फांसी
- 28 सितंबर 2010 को एक बच्ची की हत्या के मामले में कोली को फांसी
- 22 दिसंबर 2010 को एक बच्ची की हत्या के मामले में कोली को फांसी
- 24 दिसंबर 2012 को एक बच्ची की हत्या के मामले में कोली को फांसी
- 07 अक्टूबर 2016 को एक महिला की हत्या के मामले कोली को फांसी
- 16 दिसंबर 2016 को एक युवती के मामले में कोली को फांसी
- 24 जुलाई 2017 को एक युवती की हत्या मामले में कोली-पंधेर को फांसी
- 08 दिसंबर 2017 को एक युवती की हत्या मामले में कोली-पंधेर को फांसी
- 29 दिसंबर, 2006 को पुलिस ने निठारी कांड का खुलासा करते हुए नोएडा के सेक्टर-31 की कोठी नंबर डी-5 से सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को गिरफ्तार किया था। तब पुलिस ने डी-5 कोठी के पास नाले से दर्जनों बच्चों के कंकाल बरामद किए थे।
-10 जनवरी 2007 को सभी मामले सीबीआई को सुपुर्द कर दिए गए थे। सीबीआई ने कुल 19 एफआईआर में से 16 में आरोप पत्र अदालत में पेश किए। 16 मामलों में से अब तक सुरेंद्र कोली को सात मामलों में फांसी की सजा हो चुकी है।
-13 फरवरी, 2009: पहले मामले में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई। 11 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर दिया। जबकि सुरेंद्र कोली की सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 7 जनवरी को सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया।
-12 मई, 2010 : दूसरे मामले में फांसी की सजा सुनाई।
-28 सितंबर, 2010 : तीसरे मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
-22 दिसंबर, 2010 : चौथे मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
-24 दिसंबर, 2012 : पांचवें मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
-7 अक्तूबर, 2016 : छठे मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
-16 दिसंबर, 2016 : सातवें मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।