भारतीय शास्त्रीय नृत्य केंद्र कामाख्या कलापीठ की संस्थापक पदम विभूषित एवं राज्यसभा सांसद सोनल मानसिंह ने कहा कि निर्भया के साथ हुई वारदात में शामिल नाबालिग को मामूली सजा देने के बाद छोड़ दिया गया, लेकिन वह अब बालिग हो चुका है। प्रशासन को अब उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे भी दोषी ठहराकर अन्यों की तरह सजा दी जाए।
बेटियां कोई खिलौना नहीं हैं, जिसके साथ कभी भी खेल लो और खेलकर तोड़ दो। जब तक लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक महिलाएं दिल्ली या अन्य जगहों पर सुरक्षित नहीं होंगी। निर्भया को न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की गई, लेकिन फिर भी सात साल बीत गए हैं और निर्भयों को न्याय नहीं मिला है।
देश की अन्य बेटियों के साथ भी ऐसी घटनाएं घटीं, लेकिन निर्भया के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इतना कुछ होने पर भी लोग निर्भया के दोषियों को बचाने के लिए अदालतों में याचिकाएं दायर कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
साहित्यकार शैफालिका वर्मा का कहना है कि दुष्कर्म एक मानसिक बीमारी हो गई है। इसके पीछे कई वजह हैं। पहले फिल्में पारिवारिक होती थीं, लेकिन अब फिल्मों में अंग प्रदर्शन होता है। इंटरनेट पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री भी अपरिपक्व एवं विकृत मस्तिष्क वाले बालिग या नाबालिग के मस्तिष्क पर बुरा असर डाल रही है।
इस विकृत मानसिकता को बदलने के लिए बेहतर एवं सम्यक शिक्षा व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि लोगों को महिला के सम्मान और मर्यादा की सीख दी जा सके। निर्भया के साथ दरिंदगी करने वालों को सुनाई गई सजा पर भी जल्द अमल किया जाना चाहिए, ताकि ऐसे लोगों को सबक मिल सके और दूसरों को दुष्कर्म के अंजाम से डर लगने लगे।