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दिल्ली पुलिस ने गोली चलाने की बात से किया इंकार, शांति बनाए रखने की अपील

Mon, 16 Dec 2019 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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दिल्ली में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
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जामिया नगर व आसपास के इलाकों में देर रात तक तनाव बना हुआ था। दिल्ली के सभी सीनियर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। दिल्ली पुलिस ने गोली चलाने की बात से इनकार करते हुए लोगों से शांति बनाने और किसी तरह की अफवाह न फैलाने की अपील की है। 

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दिल्ली पुलिस का कहना है कि छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने तैयारियों के साथ पथराव व हिंसा की है। हालांकि, छात्रों को गोली लगने की कही जा रही थी, मगर दिल्ली पुलिस ने इस बात से इंकार किया है। देर रात शांति बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाला। 

दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने हिंसा के बाद दिए बयान में कहा है कि जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के छात्र आदि लोग कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार को भी छात्रों के कुछ ग्रुप ने प्रदर्शन किया। 
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दिल्ली पुलिस इन छात्रों का सहयोग कर रही थी। शाम करीब चार बजे सराय जुलैना की तरफ से डेढ़ से दो हजार छात्र आए और मथुरा रोड पर जाम लगाना शुरू किया। छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की तो उन्होंने पथराव और बसों में तोड़फोड़ करना शुरू कर दिया। छात्रों को पीछे हटाने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया।

दक्षिणी परिक्षेत्र के संयुक्त पुलिस आयुक्त देवेश श्रीवास्तव ने रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे बताया कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से पथराव किया गया। पेट्रोल बम फेंके गए। प्रदर्शनकारी काफी उग्र थे। 

सरकारी वाहनों, प्राइवेट वाहन, बस और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त का कहना था कि गोली चलने व छात्रों को गोली लगने की बात देर रात तक उनकी संज्ञान में नहीं आई थी। देर रात तक हालात नियंत्रण में थे।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मंदीप सिंह रंघावा का कहना था कि सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। हालात शांतिपूर्ण व नियंत्रण में हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाने की अपील की थी। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि पुलिस ने स्कूलों को बंद करने का आग्रह किया है। प्रदर्शनकारियों द्वारा बटला हाउस पर पुलिस बूथ को जलाने की बात कही जा रही है। छात्र की मौत महज अफवाह है।

तोड़फोड़ के साथ बसों में लूटपाट भी की
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने एक तरफ जहां बसों में तोड़फोड़ की वहीं यात्रियों से लूटपाट भी की। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बात की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। इस बात की जांच की जा रही है। 

कितने प्रर्दशनकारी घायल हुए हैं जानकारी नहीं
दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि देर रात तक इस बात की जानकारी नहीं मिली थी कि कितने प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस को प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी देर रात तक नहीं मिली थी। पुलिस अधिकारी आंसू गैस व हल्के बल के प्रयोग की बात कर रहे हैं। 

पुलिस का तर्क, पेट्रोल बम फेंके, पथराव किया

जामिया नगर इलाके में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जब उपद्रवियों को खदेड़ा तो भीड़ जबरन जामिया कैंपस में घुस गई। उपद्रवियों के पीछे पुलिस भी कैंपस में घुस गई। 

आरोप है कि पुलिस वहां घुसकर उपद्रवियों के बहाने छात्रों को बुरी तरह पीटा और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इसके बाद पुलिस को आलोचना झेलनी पड़ी। पुलिस अधिकारियों ने यहां तक कहा कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस पर पेट्रोल बम तक फेंके। देर रात तक पुलिस इलाके में मार्च करती रही।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उपद्रवी कैंपस में घुस गए और उन्होंने बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया। वहां से घायलों को लेकर गुजर रही एक कैट्स की एंबुलेंस भी पथराव किया गया। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को कैंपस के भीतर घुसना पड़ा। कैंपस में भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोली छोड़े गए। 

पुलिस ने कैंपस से भारी संख्या में उपद्रव कर रहे लोगों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया। कुछ वीडियो में छात्रों को हाथ उठाकर कैंपस से बाहर निकलकर जाते हुए देखा गया। देर रात तक यह वीडियो मीडिया में भी आ गया। 
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पुलिस का नेटवर्क फेल, पहले ही किया था बंद का आह्वान

जामिया नगर इलाके में रविवार को हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर पुलिस का लोकल नेटवर्क फेल हो गया। सूत्रों के मुताबिक, जामिया नगर में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में रविवार को बंद का आह्वान किया गया था। इसका असर भी देखने को मिला। 

इलाके की सभी मार्केट पूरी तरह बंद रही। सुबह से ही लोगों ने समूह बनाकर इलाके में पैदल मार्च निकालना शुरू कर दिया था। विरोध मार्च के बाद भी पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। दोपहर होते-होते प्रदर्शन दो बड़े समूह में बंट गया। एक समूह शाहीन बाग के सामने सरिता विहार-नोएडा रोड पर स्थानीय विधायक अमानतुल्लाह के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहा था। 

दूसरा समूह जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय के पास प्रदर्शन कर रहा था। जामिया से भीड़ आगे बढ़ी और उसने हिंसा की। सूत्रों का कहना है कि भीड़ को अगर वहीं पर रोक लिया जाता तो शायद हिंसा इतने बड़े पैमाने पर नहीं होती।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को छात्रों ने जब अधिनियम का विरोध किया था तो स्थानीय लोगों ने भी उनका पूरा साथ दिया। शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन में स्थानीय लोग शामिल रहे। दो दिन प्रदर्शन के बाद इलाके के लोगों ने रविवार को बंद का आह्वान कर दिया। बावजूद इसके, पुलिस गंभीर नहीं हुई। सुबह भीड़ ने पूरे जामिया नगर इलाके में विरोध प्रदर्शन और मार्च किया। 

कुछ लोगों ने अपनी दुकानें खोली भी हुई थीं, भीड़ ने जबरन उनकी बंद करवा दीं। दोपहर दो बजे के बाद धीरे-धीरे छोटे-छोटे समूहों ने दो बड़े ग्रुप का रूप अख्तियार कर लिया। इसके बाद भी पुलिस स्थिति को नहीं भांप पाई। भीड़ बढ़ती गई और शाम को हिंसा का रूप ले लिया। जब तक पुलिस हालात को समझ पाती तब तक हालात बेकाबू हो गए। इसके बाद पुलिस को अर्द्घसैनिक बल को भी बुलाना पड़ा।
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