वंसत कुंज इलाके में वर्ष 2012 में चलती बस में हुए निर्भया कांड के दोषियों को फांसी की सजा पर अमल न होने पर दिल्ली महिला आयोग ने नाराजगी जताई थी। फांसी संबंधी फैसले पर अमल न होने पर आयोग ने तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। आयोग ने प्रशासन को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि दोषियों को फांसी देने के लिए जेल अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा था इस मामले में उच्चतम न्यायलय ने चारों दोषियों की अपील खारिज करते हुए 5 मई 2017 को फांसी संबंधी फैसले पर मोहर लगा दी गई थी। इसके बाद मामले में दोषियों ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी और सर्वोच्च न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 को इसे भी ख़ारिज कर दिया था।
आयोग ने इस संबंध में तिहाड़ जेल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल को नोटिस जारी किया था। अधिकारियों से यह जानकारी मांगी है कि क्या दोषियों को फांसी देने के लिए जेल अधिकारियों ने क्या कदम उठाए है।
स्वाति मालीवाल ने कहा था कि 6 साल पहले हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब भी बलात्कार के मामलों में कोई कमी नहीं आई है। ऐसी घटनाएं बढ़ने की वजह यह है कि अपराधियों के मन में कोई डर नहीं है। जरूरी है कि अपराधियों के मन में डर पैदा हो, इसके लिए निर्भया के कातिलों को जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ाया जाए। जिससे कि निर्भया और उसके परिवार को न्याय मिल सके।