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निर्भया केसः फांसी की नई तारीख पर सुनवाई से पहले बोलीं मां- कई तारीखें आई-गईं, लेकिन...

Mon, 17 Feb 2020 11:09 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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निर्भया की मां आशा देवी - फोटो : एएनआई
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निर्भया केस में जनवरी से लेकर अब तक दो बार फांसी की तारीख रद्द हो चुकी है। आज(17 फरवरी) एक बार फिर निर्भया की दोषियों के लिए नई फांसी की तारीख पर बहस होगी। हालांकि निश्चित तौर पर यह कहा नहीं जा सकता कि आज फांसी की तारीख तय हो ही जाएगी। ऐसे में निर्भया की मां आशा देवी का बयान आया है। उन्होंने जो कहा इससे यह जरूर लगता है कि वह दोषियों को फांसी में इतनी देरी से दुखी जरूर हैं लेकिन वह निराश नहीं हैं। उन्होंने उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं।
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दरअसल निर्भया की मां ने सोमवार सुबह न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि, 'अदालत में सुनवाई की कई तारीखें आई-गईं लेकिन फांसी की नई तारीख की घोषणा नहीं हुई। लेकिन फिर भी हम नई उम्मीद के साथ हर सुनवाई के लिए जाते हैं। उनके वकील हर बार केस को देर करने के तरकीब अपनाते हैं। मैं नहीं कह सकती कि आज केस में क्या होगा लेकिन मैं आशांवित हूं।'
 

निर्भया के दोषियों के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई आज

निर्भया के दोषियों की फांसी के लिए नए डेथ वारंट की मांग वाली याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। अदालत की ओर से मुहैया कराए गए नए वकील रवि काजी पहली बार दोषी पवन का पक्ष रखेंगे।

तिहाड़ जेल प्रशासन और निर्भया के माता-पिता चारों दोषियों को जल्द फांसी पर लटकाने के लिए नया डेथ वारंट जारी करने की मांग करेंगे। पवन ने याचिका दायर न की तो कोर्ट डेथ वारंट जारी कर सकती है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने पिछली सुनवाई के बाद दोषी पवन के केस को पेश करने के लिए सरकारी वकील रवि काजी की नियुक्त किया है। इससे पहले वकील एपी सिंह अदालत में पवन की पैरवी कर रहे थे। उन्होंने पिछली सुनवाई में पवन की पैरवी से इनकार कर दिया था।
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नए वकील रवि काजी कोर्ट को बताएंगे कि पवन की ओर से क्यूरेटिव या दया याचिका दायर की गई है या नहीं। निर्भया के दोषियों विनय, मुकेश और अक्षय के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं, लेकिन पवन के पास अब भी क्यूरेटिव और दया याचिका दायर करने का मौका है।

हाईकोर्ट ने 5 फरवरी को दोषियों के सभी कानूनी विकल्पों के उपयोग का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन पवन की ओर से कोई याचिका दायर नहीं की गई। पिछली सुनवाई में उसके पिता ने किसी भी कानूनी विकल्प के उपयोग से इनकार कर दिया था। नियम है कि किसी दोषी की याचिका लंबित नहीं है तो डेथ वारंट जारी किया जा सकता है।
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