याचिका में दिल्ली सरकार ने कहा था कि चारों दोषियों के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं और अब उनके पास कोई रास्ता नहीं है। इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों को नोटिस जारी करके गुरुवार तक जवाब मांगा था।
इस पर दिल्ली सरकार के वकील ने दलील दी कि चूंकि दोषियों के पास अब कोई कानूनी विकल्प बाकी नहीं है तो उन्हें नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा था कि प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) का हिस्सा हैं और दूसरे पक्ष को सुनने के सिद्धांत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने निर्भया के दोषियों विनय शर्मा (26), मुकेश कुमार सिंह (32), अक्षय कुमार सिंह (31) और पवन गुप्ता (25) को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था। इससे पहले भी दोषियों की फांसी के लिए जारी किए गए दो डेथ वारंट पर कानूनी विकल्प मौजूद होने के कारण अदालत ने रोक लगा दी थी।
इन दोषियों को तीन मार्च को फांसी होनी थी, लेकिन दया याचिका लंबित होने को ध्यान में रखते हुए अदालत ने 2 मार्च को फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। हालांकि अब दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं, इसके बाद उन्हें फांसी पर लटकाने का रास्ता साफ हो चुका है।