निर्भया की मां ने ये भी कहा कि अदालत को पुनर्विचार याचिका को सुनना चाहिए, लेकिन इस याचिका को पहले ही खारिज कर देना चाहिए था। हमारे पास कोई विकल्प नहीं है सिवाय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकारने के।
हम पिछले सात साल से संघर्ष कर रहे हैं। कोर्ट को उनकी फांसी की तारीख की जल्द घोषणा कर देनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार के 2012 के उन वादों पर भी सवाल उठाए, जिनमें फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना व सीसीटीवी लगाने को कहा गया था, लेकिन वे अब तक पूरे नहीं हो सके हैं।
उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक तो बन गए लेकिन कोई भी इनमें न्यायाधीशों की कमी होने की बात नहीं करता।
निर्भया की वकील ने कहा है कि इस मामले में मौत की सजा पाए एक दोषी ने प्रक्त्रिस्या को लटकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। निर्भया की वकील सीमा कुशवाहा ने उम्मीद जताई कि कोर्ट इस याचिका को खारिज कर देगा। इस पुनर्विचार याचिका में कोई आधार नहीं है।
कुशवाहा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को उनकी मौत की सजा बरकरार रखने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के लिए उनके पास 30 दिन का समय था, लेकिन दो साल बीतने के बावजूद उन्होंने ऐसा नहीं किया। मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर करने के देरी के आधार इसे खारिज कर देगा।