एक दिन अचानक गायब हुए पति की मौत का प्रमाण पत्र हासिल करने में महिला को नौ साल लग गए। इसके लिए उसने सरकारी विभागों के चक्कर काटे और अधिकारियों की मिन्नतें कीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उसने पति को मृत घोषित करने की गुहार अदालत से लगाई।
तीस हजारी अदालत के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विनोद कुमार गौतम ने विद्या देवी की याचिका पर उसके पति देशराज को मृत घोषित करते हुए उत्तरी दिल्ली नगर निगम को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। देशराज 16 जुलाई 2009 को काम पर गया, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटा।
कोर्ट के समक्ष याचिका पर जिरह में अधिवक्ता रंजन कठुमरिया व कुणाल कठुमरिया ने कहा कि याची महिला अनुसूचित जाति की है और उसका पति देशराज जुलाई 2009 से गायब है। पुलिस उसकी गुमशुदगी के केस में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। इसलिए उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के मुताबिक, अगर किसी शख्स का सात साल तक कोई सुराग नहीं मिलता तो उसे मृत मान लिया जाता है।
इस मामले में निगम ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से इंकार कर दिया। निगम का कहना था कि उसे किसी शख्स को मृत घोषित करने का अधिकार नहीं है। वह केवल प्रमाण पत्र जारी करता है। इसके बाद महिला ने एक जून 2018 को दिल्ली सरकार और उत्तरी दिल्ली नगर निगम के खिलाफ याचिका दायर की थी।
महिला ने याचिका में कहा कि उसका पति सिंडिकेट बैंक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था। वह 16 जुलाई 2009 को काम पर गया, लेकिन वापस नहीं लौटा। उसने छह अगस्त 2009 को करोल बाग थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने गुमशुदगी की सूचना अखबार में दी, लेकिन देशराज का कोई सुराग नहीं लगा।