रमजान के पाक महीने की एक रात शब-ए-कद्र की रात होती है। इस रात इबादत से एक हजार महीने से ज्यादा की इबादत के बराबर सबाब (फल) मिलता है। इसका समय रमजान के 21वीं रात से शुरू होता है।
नोएडा सेक्टर-8 स्थित जामा मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद राशिद कासमी ने बताया कि शब-ए-कद्र की रात 21वीं, 23, 25, 27 और 29वीं रात में से कोई एक रात होती है।
रोजेदार इन पांचों रातों को जागकर खुदा की इबादत करते हुए शब-ए-कद्र की तलाश करते हैं। उन्हें यह नहीं पता होता है कि इनमें से शब-ए-कद्र की रात कौन सी होगी। लिहाजा रोजेदार पांचों रात जागकर खुदा की इबादत करते हैं।
उन्होंने बताया कि जो भी इस रात को इबादत करता है, उसके सारे गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात की दुआ जरूर कबूल होती है।
मान्यता है कि पूरी रात फरिश्ते इंसानों की जानकारी अल्लाह तक पहुंचाते हैं। नोएडा जामा मस्जिद में करीब 500-700 लोग रात भर जागकर इबादत करेंगे। इसमें सभी उम्र, वर्ग के रोजेदार शामिल होंगे। इबादत का समय दिन डूबने के बाद दिन निकलते तक का होता है।