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कैंपस की रातों पर लग रहा राजनीति का ग्रहण, जेएनयू के ढाबे खो रहे रौनक

Fri, 13 May 2016 04:26 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, ब्यूरो
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जेएनयू में छात्रों के आंदोलन और भूख हड़ताल को देखते हुए कैंपस में जहां हर ओर गहमा गहमी है वहीं, इसका सीधा असर विश्वविद्यालय में  खुले ढाबों पर भी पड़ना शुरु हो गया है। 
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तनावयुक्त माहौल और भूख हड़ताल ने जेएनयू के ढाबों को भी अपने प्रभाव में ले लिया है। यहां हर जगह सन्नाटा पसरा हआ है। जेएनयू की शान यहां के ढाबे माने जाते हैं जो देर रात दो बजे तक खुले रहते हैं। 

लेकिन, अब इन जगहों पर एक्का दुक्का छात्र ही दिखाई पड़ते हैं। यहॉ तक की जेएनयू का मशहूर गंगा ढाबा भी अब खाली सा दिखाई पड़ता है।

जब इस बारे में छात्रों से बात की गई तो उनका जवाब था कि आखिर हम कैसे खा सकते हैं, जब हमारे दोस्त भूखे हैं। जेएनयू कैंपस साउथ दिल्ली के फूड हब के तौर पर जाना जाता है लेकिन, पिछले कई महीनों से यहां चल रहे आन्दोलनों ने इन्हें लगभग ठप सा कर दिया है। चूंकि छात्र खाने के बहाने ही यहां पर आते थे और वक्त बिताते थे लेकिन अब ये भी बंद हो गया है।
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इस बारे में जेएनयू के छात्र संजीत सिन्हा का कहना है,'मैंने लगभग एक महीने से जेएनयू के किसी ढाबे में कुछ नहीं खाया है जबकि पहले पैं वहां घंटों बिताया करता था।

वहीं, दुसरी छात्रा दिव्या शर्मा का कहना है कि जेएनयू में आने के बाद ढाबे ही हमारे पाटी‍‍ स्पॉट हुआ करते थे जहां हम घंटों बिताते‌ थे। हालांकि अब भी हम वहां जाते तो हैं लेकिन अब उस तरह की बहस का दौर नहीं चलता।
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अब नहीं चलता बहस का दौर

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वहीं, दूसरी छात्रा दिव्या शर्मा का कहना है कि जेएनयू में आने के बाद ढाबे ही हमारे पाटी‍‍ स्पॉट हुआ करते थे जहां हम घंटों बिताते‌ थे। हालांकि अब भी हम वहां जाते तो हैं लेकिन अब उस तरह की बहस का दौर नहीं चलता।

वहीं, जेएनयू के प्रोफेसरों का कहना है कि स्टूडेंट्स वहां जाने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यहां कभी वो पुलिस के हत्‍थे चढ़ सकते हैं। जबकि ढाबा मालिकों का कहना है कि अब छात्रों की इन जगहों पर खाने पीने में दिलचस्पी नहीं रही है क्योंकि उनके दोस्तों ने भूख हड़ताल कर रखी है तो वो कैसे खा सकते हैं। 

जेएनयू के इस बदले माहौल का असर यहां आने वाले अतिथियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अब किसी भी अनजान व्यक्ति को कैंपस में आने के लिए बाकायदा अनुम‌ति लेनी पड़ती है। ऐसे ही अनुभव का जिक्र करते हुए डीयू के छात्र राहिल ‌मित्तल बताते हैं कि देर रात तक साकेत और आस-पास के इलाकों में शो करने के बाद हम लोग जेएनयू कैपस के ढाबो में खाना पसंद करते थे लेकिन, अब तो खाना तो दूर कैंपस में घुसना भी मुश्किल हो गया है।


 
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