जेएनयू में छात्रों के आंदोलन और भूख हड़ताल को देखते हुए कैंपस में जहां हर ओर गहमा गहमी है वहीं, इसका सीधा असर विश्वविद्यालय में खुले ढाबों पर भी पड़ना शुरु हो गया है।
तनावयुक्त माहौल और भूख हड़ताल ने जेएनयू के ढाबों को भी अपने प्रभाव में ले लिया है। यहां हर जगह सन्नाटा पसरा हआ है। जेएनयू की शान यहां के ढाबे माने जाते हैं जो देर रात दो बजे तक खुले रहते हैं।
लेकिन, अब इन जगहों पर एक्का दुक्का छात्र ही दिखाई पड़ते हैं। यहॉ तक की जेएनयू का मशहूर गंगा ढाबा भी अब खाली सा दिखाई पड़ता है।
जब इस बारे में छात्रों से बात की गई तो उनका जवाब था कि आखिर हम कैसे खा सकते हैं, जब हमारे दोस्त भूखे हैं। जेएनयू कैंपस साउथ दिल्ली के फूड हब के तौर पर जाना जाता है लेकिन, पिछले कई महीनों से यहां चल रहे आन्दोलनों ने इन्हें लगभग ठप सा कर दिया है। चूंकि छात्र खाने के बहाने ही यहां पर आते थे और वक्त बिताते थे लेकिन अब ये भी बंद हो गया है।
इस बारे में जेएनयू के छात्र संजीत सिन्हा का कहना है,'मैंने लगभग एक महीने से जेएनयू के किसी ढाबे में कुछ नहीं खाया है जबकि पहले पैं वहां घंटों बिताया करता था।
वहीं, दुसरी छात्रा दिव्या शर्मा का कहना है कि जेएनयू में आने के बाद ढाबे ही हमारे पाटी स्पॉट हुआ करते थे जहां हम घंटों बिताते थे। हालांकि अब भी हम वहां जाते तो हैं लेकिन अब उस तरह की बहस का दौर नहीं चलता।