नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने स्वच्छ गंगा मिशन के लिए दूसरे चरण (हरिद्वार से कानपुर गंगा क्षेत्र) का फैसला सुनाने से पहले केंद्र व उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्राधिकरणों पर सख्ती करनी शुरू कर दी है।
गंगा और उसकी प्रमुख सहायक नदियों में बिना शोधन सीधे निकासी किए जाने वाले औद्योगिक व घरेलू अपशिष्ट को लेकर एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को फटकार भी लगाई है। बेंच ने कहा कि सभी प्राधिकरण स्पष्ट निर्देश लेकर सही तथ्य और आंकड़े ट्रिब्युनल के समक्ष पेश करें। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान यूपीपीसीबी ने अपने आंकड़ों के आधार पर ट्रिब्युनल को बताया कि हरिद्वार से कानपुर क्षेत्र के बीच गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे कुल 31 कस्बे बसे हैं। इनसे प्रतिदिन गंगा में बिना शोधन 544 मिलियन लीटर सीवेज (एमएलडी) की निकासी गंगा में होती है। प्रतिदिन पैदा होने वाले अपशिष्ट में महज 176.27 एमएलडी अपशिष्ट का ही शोधन होता है।