पीठ ने कहा कि बीते वर्ष 8 दिसंबर को ट्रिब्युनल ने इस आशय वाली एक अधिसूचना को रद्द कर दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि इस तरह की अधिसूचना से पूरे देश में पर्यावरण की क्षति होगी। पीठ ने कहा इस बार जारी की गई अधिसूचना भी प्रथम दृष्टि में अनुचित प्रतीत होती है। यदि मंजूरी संबंधी विकेंद्रीकरण करना है तो इसके लिए सबसे पहले एक विश्वसनीय तंत्र होना चाहिए। मामले पर अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।
अमर उजाला ने 18 नवंबर के अंक में प्रकाशित की थी खबर
अमर उजाला ने 18 नवंबर के अंक में ‘रियल एस्टेट के लिए पर्यावरण मंजूरी की शर्त खत्म’ शीर्षक से पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचनाओं को लेकर विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। इसमें पर्यावरणविदें ने अधिसूचना को कानूनी चुनौती देने की बात कही थी।