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Delhi CM House: LG के बाद अब NGT का एक्शन, जांच समिति का गठन; पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर मांगी रिपोर्ट

Tue, 09 May 2023 08:00 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

हाउस रेनोवेशन मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने रिपोर्ट मांगी और अब एनजीटी ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित की है।
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एनजीटी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के हाउस रेनोवेशन के मामले में पहले उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने रिपोर्ट मांगी और अब एनजीटी ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित की है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को एक संयुक्त समिति का गठन कर दिया।। जिसमें दिल्ली के मुख्य सचिव, पर्यावरण और वन प्रधान सचिव, दिल्ली शहरी कला आयोग के सदस्य और उत्तरी जिला मजिस्ट्रेट शामिल है। ताकि कथित उल्लंघन के बारे में तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाया जा सके।

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सीएम आवास रेनोवेशन मामले में एक याचिका के जरिए किए गए दावे पर समिति का गठन किया है। केजरीवाल के बंगले को लेकर पेड़ काटने के मामले में दिल्ली की केजरीवाल सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है। सीएम आवास में पर्यावरण मानकों के उल्लंघन पर खासी नाराजगी जताई है। पर्यावरण कानून के उल्लंघन पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। 

पर्यावरण मानकों के उल्लंघन पर याचिका
एनजीटी ने एक याचिका में लगे आरोपों पर कहा कि निर्माण के दौरान सीएम आवास के विकास के लिए 20 से ज्यादा पेड़ों को काट दिया गया। पीठ के अध्यक्ष जज ए के गोयल ने कहा कि दिल्ली के भीड़भाड़ और प्रदूषित शहर में निर्माण के लिए पेड़ों को काटने और हरित बेल्ट को पूरा करने वाली शर्त के अनुपालन की आवश्यकता के महत्व को देखते हुए हम एक संयुक्त समिति का गठन कर रहे हैं। ये समिति तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाएगी। जो बहुत जरूरी है। समिति की बैठक एक सप्ताह के अंदर हो सकती है। आज से तीन सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देनी होगी। समिति किसी से भी पूछताछ और साइट पर जाने के लिए स्वतंत्र होगी। 
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पर्यावरण उल्लंघन पर एनजीटी करेगा कार्रवाई
एनजीटी ने कहा कि उल्लंघन के मामले में समिति कानून कार्रवाई करेगी। इस मामले को 31 मई तक के लिए टाल दिया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्णाम पूरी तरह से अवैध है। बिना डीयूएसी की मंजूरी से काम किया गया है। साल 2009 में दिल्ली सरकार के आदेश में कहा गया है कि 10 से 20 से अधिक पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगने वाले सभी आवेदनों पर कार्रवाई होनी चाहिए। और फारेस्ट कंजर्वेटर को रिपोर्ट देनी चाहिए। लेकिन लोक निर्माण विभाग ने सरकार के इन आदेशों का उल्लंघन किया है। पेड़ों को काट दिया है। 
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