नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कई आदेशों के बावजूद यमुना नदी में अवैध तरीके से बालू का उत्खनन जारी है। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमाओं में लगे जिलों में यमुना नदी के भीतर अवैध खनन के एक ताजा मामले में प्राधिकरणों के साथ उत्खनन मंजूरी हासिल करने वाले निजी ठेकेदारों को मिलाकर कुल 35 पक्षकारों को नोटिस दिया है।
हरियाणा निवासी व पेशे से किसान याची ने दोनों राज्यों में यमुना से बालू उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुस्तकीम की याचिका पर विचार के बाद यह नोटिस जारी किया है। ग्रीन बेंच ने पक्षकारों में शामिल पर्यावरण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश व हरियाणा सरकार के साथ राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण व अन्य से अगली सुनवाई में जवाब मांगा है। याची की ओर से एडवोकेट विक्रम पुनिया, देवाशीष भरूका पेश हुए।
उत्तर प्रदेश व हरियाणा के इन जिलों में हो रहा उत्खनन
याची का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, सहरानपुर व हरियाणा में यमुना नगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत जिलों में यमुना किनारों से बालू उत्खनन के लिए दी गई लीज को समाप्त किया जाए।
साथ ही इस संबंध में आदेश दिया जाए कि किसी भी तरह की मशीनी व अर्द्धमशीनी (मैकेनाइज्ड व सेमी मैकेनाइज्ड) तरीके से बालू उत्खनन न हो।
सुनवाई के दौरान याची की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि खास शर्तों व नियमों के साथ उत्खनन पर छूट है। इसके बावजूद भारी-भरकम मशीनों के जरिए यमुना नदी के किनारों से बालू उत्खनन किया जा रहा है।
यमुना में बालू उत्खनन पर लगाया था रोक
खासतौर से गंगा की तरह यमुना में भी ट्रिब्यूनल ने उत्खनन पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद उत्खनन किया जा रहा है। याची ने मांगी की है कि यूपी और हरियाणा में यमुना में किसी भी स्थान पर उत्खनन के लिए रोक लगाई जाए। वहीं उत्खनन से पहले मंजूरी हासिल करने के लिए सख्त व कड़े नियम लागू किए जाएं।
मालूम हो कि ट्रिब्यूनल ने बीते वर्ष एक दूसरे मामले में यमुना नदी के किनारों से वैध और अवैध दोनों तरह के बालू उत्खनन पर रोक लगा दिया था।
एनजीटी का यह निर्देश तब आया था जब याची ने आरोप लगाया था कि नोएडा से फरीदाबाद तक बालू उत्खनन के लिए अवैध ब्रिज बनाया गया है।