नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वाहनों के अंदर मौजूद फ्लेम रिटार्डेंट रसायनों से होने वाले स्वास्थ्य खतरों को लेकर चल रहे अध्ययन की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। यह अध्ययन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा किया जा रहा है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अगली सुनवाई से पहले अध्ययन की ताजा स्थिति अदालत के सामने रखी जाए। यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज किया था, जिसमें दावा किया गया था कि लोग अपनी गाड़ियों के अंदर कैंसर पैदा करने वाले रसायनों को सांस के जरिए अंदर ले रहे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होगी।
इससे पहले एनजीटी ने आईसीएमआर को निर्देश दिया था कि वह 18 महीनों के भीतर यह पता लगाए कि गाड़ियों के अंदर इस्तेमाल होने वाले फ्लेम रिटार्डेंट रसायन चालकों और यात्रियों के स्वास्थ्य पर कितना असर डालते हैं। आईसीएमआर ने अधिकरण को बताया कि अध्ययन 24 सितंबर 2025 से शुरू हो चुका है। इसके तहत जरूरी स्टाफ की नियुक्ति की गई है, आवश्यक रसायन और उपकरण खरीदे जा रहे हैं और अहमदाबाद व गांधीनगर में फील्ड सर्वे भी किया गया है। साथ ही आधुनिक जांच उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया भी चल रही है। एनजीटी ने आईसीएमआर के इस भरोसे को रिकॉर्ड पर लिया कि अध्ययन तय समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा। अधिकरण ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अध्ययन की ताजा प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए। संवाद