अदालत ने सीपीसीबी को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
देश में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। यह निर्देश तब दिया जब सीपीसीबी की एक विस्तृत रिपोर्ट में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग व्यवस्था की बड़ी कमियां सामने आईं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग की कोई अधिकृत सुविधा नहीं है। इनमें दिल्ली, गोवा, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा सहित कई क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में ई-वेस्ट को दूसरे राज्यों में मौजूद अधिकृत रीसाइक्लिंग यूनिट तक भेजा जा रहा है।
सीपीसीबी ने सभी राज्यों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से छह प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इनमें रीसाइक्लिंग यूनिट की स्थापना, एक राज्य से दूसरे राज्य में ई-वेस्ट के परिवहन का रिकॉर्ड, अनधिकृत (इनफॉर्मल) कारोबार पर कार्रवाई और 2022 के नियमों के तहत इलेक्ट्रॉनिक सामान की 106 श्रेणियों की सूची (इन्वेंटरी) तैयार करना शामिल है। इसमें 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जवाब दिया है, लेकिन बिहार, झारखंड और उत्तराखंड ने अब तक जानकारी नहीं दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि 21 राज्यों में ई-वेस्ट के अंतरराज्यीय परिवहन का रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा जा रहा है। सिर्फ 12 राज्यों ने खतरनाक और अन्य कचरे से जुड़े नियमों के तहत ट्रैकिंग की व्यवस्था होने की जानकारी दी है। सही ट्रैकिंग सिस्टम न होने से ई-वेस्ट के अनौपचारिक क्षेत्र में जाने का खतरा बढ़ जाता है।
27 राज्यों ने कहा कि निरीक्षण के दौरान अनधिकृत ई-वेस्ट कारोबार नहीं मिला। हालांकि, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में ऐसे मामले सामने आए, जहां सामान जब्त किया गया और पर्यावरणीय मुआवजा भी लगाया गया। इसमें सिर्फ सात राज्यों ने 2022 के नियमों के तहत सभी 106 श्रेणियों की पूरी इन्वेंटरी तैयार की है। बाकी 26 राज्यों में यह प्रक्रिया अभी जारी है। सीपीसीबी ने बताया कि इन्वेंटरी के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन तैयार कर ली गई हैं और राज्यों के सुझाव मिलने के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा। अदालत ने इन तथ्यों को देखते हुए सीपीसीबी को नई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई 2026 को होगी।