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एनजीटी: 'गंगा कहीं भी प्रदूषित हो, प्रदूषण ही माना जाएगा, नमूना लेने से पहले CPCB को जानकारी देना जरूरी नहीं'

Thu, 20 Feb 2025 07:40 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

एनजीटी का कहना है कि गंगा कहीं भी प्रदूषित हो, प्रदूषण ही माना जाएगा। साथ ही कहा कि गंगा में नमूना लेने से पहले सीपीसीबी के लिए जानकारी देना जरूरी नहीं है।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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एनजीटी ने बुधवार को कहा कि गंगा में नमूने लेने से पहले सीपीसीबी के लिए जानकारी प्रदान करने की कोई वैधानिक आवश्यकता नहीं है। जांच के लिए पानी का नमूना किस स्थान से लिया गया, यह मायने नहीं रखता। नदी कहीं भी प्रदूषित हो, प्रदूषण ही माना जाएगा।

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एनजीटी ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को फटकार लगाई। यूपीपीसीबी की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) गरिमा प्रसाद ने दलील दी कि सीपीसीबी ने यूपीपीसीबी को उन स्थानों के बारे में जानकारी नहीं दी, जहां से पानी के नमूने लिए गए थे।

एनजीटी ने यूपीपीसीबी से सवाल किया कि क्या वह प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान विभिन्न स्थानों पर पानी में फीकल कोलीफॉर्म के उच्च स्तर पाए जाने के सीपीसीबी की रिपोर्ट से असहमत है? 
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एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि क्या यूपीपीसीबी गंगा में प्रदूषण पर सीपीसीबी की रिपोर्ट पर विवाद या उसे चुनौती दे रहा? 

एनजीटी प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में गिरने वाले सीवेज को रोकने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि इतने महत्वपूर्ण मामले में यूपीपीसीबी का रवैया सही नहीं है। यूपीपीसीबी के अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं।

एक हफ्ते में नई रिपोर्ट देगा यूपीपीसीबी
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने कहा, यूपीपीसीबी ने 18 फरवरी को एक कार्रवाई रिपोर्ट दायर की थी। इस पर पीठ ने कहा, रिपोर्ट में फीकल कोलीफॉर्म के स्तर का उल्लेख नहीं किया गया था। रिपोर्ट 12 जनवरी से पहले की तारीखों से संबंधित थी। गरिमा प्रसाद ने एनजीटी को आश्वासन दिया कि नदी की गुणवत्ता को लेकर उत्तर प्रदेश सुधारात्मक उपाय कर रहा है। एक हफ्ते के अंदर एक नई रिपोर्ट दायर की जाएगी।
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सीपीसीबी ने 3 फरवरी को सौंपी थी रिपोर्ट
सीपीसीबी ने महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में गंगा की वास्तविक स्थिति को लेकर तैयार रिपोर्ट की थी। 3 फरवरी को एनजीटी में सौंपी अपनी रिपोर्ट में सीपीसीबी ने कहा था कि संगम का पानी नहाने योग्य नहीं है। टीम ने पाया कि फीकल कोलीफोर्म 230 एमपीएन/100 मिलीग्राम के लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार गैर-अनुपालन मिले।
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