एनजीटी प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में गिरने वाले सीवेज को रोकने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि इतने महत्वपूर्ण मामले में यूपीपीसीबी का रवैया सही नहीं है। यूपीपीसीबी के अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं।
एक हफ्ते में नई रिपोर्ट देगा यूपीपीसीबी
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने कहा, यूपीपीसीबी ने 18 फरवरी को एक कार्रवाई रिपोर्ट दायर की थी। इस पर पीठ ने कहा, रिपोर्ट में फीकल कोलीफॉर्म के स्तर का उल्लेख नहीं किया गया था। रिपोर्ट 12 जनवरी से पहले की तारीखों से संबंधित थी। गरिमा प्रसाद ने एनजीटी को आश्वासन दिया कि नदी की गुणवत्ता को लेकर उत्तर प्रदेश सुधारात्मक उपाय कर रहा है। एक हफ्ते के अंदर एक नई रिपोर्ट दायर की जाएगी।
सीपीसीबी ने 3 फरवरी को सौंपी थी रिपोर्ट
सीपीसीबी ने महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में गंगा की वास्तविक स्थिति को लेकर तैयार रिपोर्ट की थी। 3 फरवरी को एनजीटी में सौंपी अपनी रिपोर्ट में सीपीसीबी ने कहा था कि संगम का पानी नहाने योग्य नहीं है। टीम ने पाया कि फीकल कोलीफोर्म 230 एमपीएन/100 मिलीग्राम के लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार गैर-अनुपालन मिले।