नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बुधवार को सात साल से बंद पड़े गाजियाबाद के हज हाउस को फिर से खोलने पर रोक लगा दी है। अरथला गांव में स्थित सात मंजिला हज हाउस में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार न हो पाने के कारण यह फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति रघुवेंद्र एस राठौड़ की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदेश हज समिति के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इस मामले में बड़ी पीठ पहले ही आदेश पारित कर चुकी है।
ग्रीन पैनल ने उत्तर प्रदेश हज हाउस समिति को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि घरेलू अपशिष्टों के निदान के लिए इमारत में 136 किलो लीटर प्रतिदिन का एसटीपी स्थापित किया जाए।
पैनल ने कहा कि हज हाउस को चलाने के लिए जो अनुमति दी गई थी वह एक तय समय तक के लिए थी। जबकि अब तक इसमें सीवर ट्रीटमेंट की व्यवस्था नहीं है।
बता दें कि प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 मार्च 2005 में हरनंदी के तट पर आला हजरत हज हाउस का शिलान्यास किया था। एनजीटी के आदेश के बाद वर्ष 2018 में जिला प्रशासन ने हज हाउस को एसटीपी न होने के चलते सील कर दिया था।