नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय राजधानी में कूड़े के पहाड़ बने गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट को लेकर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। एनजीटी ने गौर किया है कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रतिदिन 14 हजार टन कचरा पैदा होता है लेकिन इसके प्रबंधन की व्यवस्था नहीं है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह बताए कि कूड़े-कचरे की डंपिंग के कारण दिनों दिन इन लैंडफिल साइटों की बढ़ती हाईट को घटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। पीठ ने कहा कि ये लैंडफिल साइट वायु, जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। पीठ ने दिल्ली सरकार को इतने बड़े पैमाने पर पैदा होने वाले कूड़े-कचरे के लिए जरूरी संरचना और उचित तकनीकी क्षमता न होने पर फटकार भी लगाई है।
साथ ही यमुना से जुड़ने वाले विभिन्न नालों की सफाई की स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है। पीठ ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट पर निगरानी के लिए एक समिति भी बनाई है। साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को दिल्ली सरकार के साथ मिलकर नए लैंडफिल साइट बनाने के लिए भी कदम उठाने को कहा है।