-एनजीटी ने इस मामले को गंभीर मानते हुए आगरा विकास प्राधिकरण को भी पक्षकार बनाया
-सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल और उसके आसपास के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाके में अवैध पेड़ कटान, अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेष सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित विभागों और पक्षों को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने इस मामले को गंभीर मानते हुए आगरा विकास प्राधिकरण को भी पक्षकार बनाया है और सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को होगी।
याचिकाकर्ता ने आगरा-ग्वालियर हाईवे पर उल्लंघन का लगाया आरोप
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि ताजमहल और आगरा-ग्वालियर हाईवे के आसपास संरक्षित हरित और विरासत क्षेत्र में पर्यावरण नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा ताजमहल और आगरा किले के बीच स्थित शाहजहां पार्क में कियोस्क, पक्के रास्ते और सीमेंट की संरचनाएं बनाई जा रही हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान 100 से 200 साल पुराने पेड़ों की जड़ों के पास खुदाई की गई, जिससे हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचा और पक्षियों व अन्य जीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि ताजमहल से 5 किलोमीटर के दायरे में पेड़ काटने के लिए शीर्ष अदालत की अनुमति जरूरी है। अन्य आरोपों में ग्वालियर रोड पर हरित पट्टी में अवैध निर्माण, निजी लोगों द्वारा अतिक्रमण और मेट्रो परियोजना के दौरान बिना अनुमति पेड़ कटान शामिल हैं।