-मामले की अगली सुनवाई आठ अक्तूबर को होगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने देशभर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) और प्रदूषण नियंत्रण समितियों में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों पर गंभीर चिंता जताई है। विशेष रूप से झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकरण ने कहा कि रिक्त पदों को भरने के मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई है।
सुनवाई के दौरान झारखंड बोर्ड के सदस्य सचिव ने बताया कि बोर्ड वर्तमान में स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 52 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी बोर्ड के भर्ती नियम अधिसूचित नहीं हो सके हैं। वर्ष 2025 में भर्ती नियम तैयार किए गए थे, लेकिन वे अब भी राज्य सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
एनजीटी ने कहा कि भर्ती नियमों में देरी और लंबे समय तक रिक्त पदों को न भरने से बोर्ड की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। अधिकरण ने इसे गंभीर मामला बताते हुए राज्य सरकार और बोर्ड दोनों से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भी बताया कि कई राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों ने पहले के आदेशों के बावजूद अपने जवाबों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई हैं। इस पर एनजीटी ने संबंधित सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और प्रदूषण नियंत्रण समितियों को चार सप्ताह के भीतर अपने जवाब और अद्यतन स्थिति रिपोर्ट सीपीसीबी के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई आठ अक्तूबर 2026 को होगी।