अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नोएडा के सेक्टर-137 और सेक्टर-49 की इन-सिटू आर्द्रभूमियों के आसपास ठोस कचरे और निर्माण मलबे की डंपिंग के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान आवेदक ने अधिकरण को बताया कि आर्द्रभूमियों के आसपास कचरे और निर्माण मलबे की डंपिंग को लेकर 30 जुलाई 2025 और इस साल 10 जुलाई को संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
मामले में एनजीटी ने यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि नोएडा प्राधिकरण शिकायतों पर उचित और आवश्यक कार्रवाई करे। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि प्राधिकरण जरूरी कदम नहीं उठाता है तो यूपीपीसीबी को स्वयं कार्रवाई करनी होगी। सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि यदि आवेदक शिकायतों की अतिरिक्त प्रतियां उपलब्ध कराता है तो प्राधिकरण आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगा।
यमुना एक्शन प्लान का भी जिक्र
सुनवाई में यमुना से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख हुआ। अधिकरण को बताया गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के 21 मई 2026 के आदेश के तहत केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जो यमुना की सफाई और संरक्षण के लिए व्यापक एक्शन प्लान तैयार करेगी। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को निर्धारित की है। उस दौरान संबंधित विभागों की ओर से की गई कार्रवाई की स्थिति पेश की जाएगी।